भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर आज देशभर में हरतालिका तीज का पावन पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना कर रही हैं। वहीं, मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए कुंवारी कन्याएं भी यह कठिन उपवास रखती हैं। इस वर्ष हरतालिका तीज पर तृतीया और चतुर्थी के मिलन के साथ गणेश चतुर्थी का अद्भुत संगम बन रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद मंगलकारी माना जा रहा है।
हरतालिका तीज और हरियाली तीज में अंतर
हालांकि दोनों ही व्रत उमा-महेश्वर को समर्पित हैं, लेकिन इनके नियमों और समय में बड़ा अंतर है:
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तिथि का भेद: हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है।
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नियमों की कठोरता: हरियाली तीज में जल और फलाहार ग्रहण करने की छूट होती है, जबकि हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है। इसमें महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल का पूर्ण त्याग कर निर्जला उपवास रखती हैं और अगले दिन सूर्योदय के बाद ही पारण करती हैं।
दुर्लभ राजयोग और ग्रहों की विशेष स्थिति
इस साल हरतालिका तीज पर कई प्रभावशाली राजयोगों और ग्रहों का दुर्लभ संगम बना है:
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5 बड़े राजयोग: इस दिन मालव्य योग, नवपंचम राजयोग, भद्र राजयोग, हंस राजयोग और लक्ष्मी नारायण राजयोग का प्रभाव रहेगा।
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तुला में शुक्र-चंद्र: तुला राशि में शुक्र और चंद्रमा की युति से शुभता में वृद्धि हो रही है। इसके अलावा रवि योग, ब्रह्म योग और ऐन्द्र योग के साथ चित्रा व स्वाति नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है।
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ग्रह स्थिति: सूर्य सिंह राशि में, गुरु कर्क में, मंगल मिथुन में, शनि मीन में, राहु कुंभ में तथा चंद्रमा व बुध कन्या राशि में विराजमान हैं।
पूजन के शुभ मुहूर्त और चौघड़िया
| प्रमुख मुहूर्त | समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | प्रातः 04:32 से प्रातः 05:19 तक |
| प्रातः पूजन का शुभ मुहूर्त | प्रातः 06:05 से प्रातः 07:06 तक |
| अभिजीत मुहूर्त | पूर्वाह्न 11:52 से दोपहर 12:41 तक |
| दिन का शुभ चौघड़िया | शुभ: 09:11 से 10:43 AM | लाभ: 03:22 से 04:55 PM | अमृत: 04:55 से 06:28 PM |
| भद्रा काल (सावधानी) | 14 सितंबर शाम 07:20 बजे से 15 सितंबर सुबह 06:06 बजे तक |
हरतालिका तीज की प्रामाणिक पूजा विधि
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प्रातः संकल्प: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल व अक्षत लेकर संकल्प लें—‘मम उमामहेश्वरसायुज्यसिद्धये हरितालिकाव्रतमहं करिष्ये।’
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प्रतिमा स्थापना: पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर बालू या शुद्ध मिट्टी से निर्मित भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें।
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अभिषेक और श्रृंगार: पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें। महादेव को धोती-वस्त्र, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार और सुहाग पिटारी भेंट करें।
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नाम स्मरण: पूजन के दौरान माता पार्वती के दिव्य स्वरूपों (उमा, पार्वती, जगद्धात्री, जगत्प्रतिष्ठा, शांतिरूपिणी, शिवा, ब्रह्मरूपिणी) और भगवान शिव के पवित्र नामों (हर, महेश्वर, शंभु, शूलपाणि, पिनाकधृक, शिव, पशुपति, महादेव) का जप करें।
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कथा और आरती: प्रदोष काल अथवा रात्रि में एकत्रित होकर हरतालिका तीज की पौराणिक व्रत कथा का श्रवण करें और कपूर से विधिवत आरती उतारें।























