नई दिल्ली: देश भर में फैले 1.2 करोड़ से अधिक गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा (सोशल सिक्योरिटी) देने के लिए केंद्र सरकार एक महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप दे रही है। इसके तहत डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और विभिन्न ऑन-डिमांड सर्विस प्रोवाइडर्स को लाइफ, हेल्थ और एक्सीडेंट इंश्योरेंस जैसे लाभ दिए जाएंगे।
इस योजना की रूपरेखा तय करने के लिए सरकार द्वारा गठित ‘नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड’ की इसी महीने के उत्तरार्ध में एक अहम बैठक होने जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, स्कीम लगभग तैयार है और इसे वर्ष 2027 में लागू किया जा सकता है।
टर्नओवर नहीं, प्रति ट्रांजैक्शन 2% लेवी का प्रस्ताव
फंड जुटाने के तौर-तरीकों को लेकर सरकार एग्रीगेटर्स (जैसे स्विगी, जोमैटो, ओला, उबर आदि) के कुल टर्नओवर पर शुल्क लगाने के बजाय प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर 2 फीसदी लेवी लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
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इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि हर प्लेटफॉर्म पर टर्नओवर का आकलन अलग-अलग होता है।
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ट्रांजैक्शन-बेस्ड मॉडल से यह सुनिश्चित होगा कि सीधे तौर पर गिग बिजनेस से जुड़े रेवेन्यू पर ही शुल्क लगे और एक सेगमेंट दूसरे को अनजाने में सब्सिडी न दे।
पूरी तरह एग्रीगेटर-फंडेड होगी योजना; वर्कर्स पर कोई बोझ नहीं
सूत्रों के अनुसार, इस सोशल सिक्योरिटी फंड में केंद्र सरकार या गिग वर्कर्स की तरफ से कोई वित्तीय अंशदान (कंट्रीब्यूशन) नहीं लिया जाएगा। इसका पूरा खर्च एग्रीगेटर कंपनियां ही वहन करेंगी।
शुरुआती चरण में मिलने वाले प्रमुख लाभ:
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लाइफ और डिसेबिलिटी (दिव्यांगता) इंश्योरेंस
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एक्सीडेंट इंश्योरेंस
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हेल्थ और मैटरनिटी बेनिफिट्स
नोट: पेंशन, प्रोविडेंट फंड (PF) और वृद्धावस्था पेंशन जैसी सुविधाओं को योजना के बाद के चरणों में जोड़ा जा सकता है।
किन्हें मिलेगा फायदा? (पात्रता नियम)
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के प्रावधानों के मुताबिक, इस सुरक्षा चक्र का हिस्सा बनने के लिए गिग वर्कर्स को न्यूनतम कार्य अवधि की शर्त पूरी करनी होगी:
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एक वित्त वर्ष में किसी एक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के साथ कम से कम 90 दिन काम किया हो, या
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कई अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कुल मिलाकर कम से कम 120 दिन काम किया हो।
तेजी से बढ़ रही है गिग इकॉनमी
देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में गिग वर्कर्स की हिस्सेदारी लगातार मजबूत हो रही है:
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संख्या में 55% उछाल: वित्त वर्ष 2020-21 में देश में 77 लाख गिग वर्कर्स थे, जो बढ़कर 1.2 करोड़ के पार पहुंच चुके हैं। यह मौजूदा वर्कफोर्स का 2% से अधिक है।
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2029-30 तक का अनुमान: नीति आयोग के आकलन के मुताबिक, 2029-30 तक देश में गिग वर्कर्स की संख्या 2.35 करोड़ हो जाएगी, जो कुल वर्कफोर्स का 6.7% होगी।
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जीडीपी में योगदान: इस क्षेत्र का जीडीपी में योगदान बढ़कर 2.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।


