नई दिल्ली। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देश की प्रमुख कैब एग्रीगेटर कंपनियों—ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन कंपनियों को अपने मोबाइल ऐप्स से ‘प्री-राइड टिप’ (यात्रा से पहले दी जाने वाली टिप) के विकल्प को तुरंत हटाने का सख्त निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने कंपनियों को मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन्स, 2025 का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं।
यात्रा से पहले या सफर के दौरान नहीं मिलेगा टिप का ऑप्शन
परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि राइड बुकिंग के समय या राइड स्वीकार होने से पहले ‘एडवांस टिप’, ‘जल्दी राइड कन्फर्म होने की संभावना बढ़ाएं’ या ‘टिप देने पर ड्राइवर के ट्रिप स्वीकार करने के चांस ज्यादा हैं’ जैसे प्रॉम्प्ट दिखाना नियमों के विरुद्ध है। अब टिपिंग का फीचर केवल यात्रा पूरी होने के बाद ही ऐप पर दिखाई देगा। बुकिंग के समय, यात्रा शुरू होने से पहले या सफर के दौरान ऐसा कोई भी विकल्प ऐप पर उपलब्ध नहीं रहेगा।
टिप देने से जल्दी राइड मिलने का दावा गलत
सरकार ने साफ कर दिया है कि एग्रीगेटर ऐप्स पर कोई भी ऐसा मैसेज या यूजर इंटरफेस नहीं होना चाहिए जो यात्रियों को यह भ्रम दे कि टिप देने से कैब जल्दी मिलेगी, ड्राइवर तुरंत राइड स्वीकार कर लेगा या बेहतर सर्विस मिलेगी। टिप को राइड कन्फर्मेशन, ड्राइवर आवंटन या वेटिंग टाइम से जोड़ना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन माना जाएगा।
ड्राइवर को मिलेगी टिप की 100% राशि
नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई यात्री सफर समाप्त होने के बाद अपनी स्वेच्छा से टिप देता है, तो उस पूरी राशि का भुगतान सीधे ड्राइवर को करना होगा। कैब एग्रीगेटर कंपनियां टिप की राशि में से किसी भी प्रकार का कमीशन या कटौती नहीं कर सकेंगी। टिप देना पूरी तरह से यात्री की अपनी इच्छा पर निर्भर रहेगा और इसे किसी भी रूप में बाध्यकारी नहीं बनाया जा सकता।

