मुंबई। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा यूपीआई (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नए नियमों की घोषणा के बाद शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है। इस पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस शुल्क को लेकर सरकार के साथ उनकी कोई चर्चा नहीं हुई है। यह एनपीसीआई का फैसला है और अब स्टॉक ब्रोकर्स तथा निवेशकों को आपस में मिलकर इसका समाधान निकालना होगा।
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कैपिटल मार्केट लेनदेन पर 0.02% MDR, अधिकतम कैप ₹300 तय
15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए प्रावधानों के तहत शेयर, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड जैसे पूंजी बाजार से जुड़े लेनदेन के लिए यूपीआई से भुगतान करने पर 0.02 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क लगेगा। हालांकि, निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि निवेश की रकम चाहे कितनी भी बड़ी हो, प्रति लेनदेन 300 रुपये से अधिक शुल्क नहीं काटा जाएगा।
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रोजमर्रा के यूपीआई लेनदेन पूरी तरह सुरक्षित और मुफ्त
आम उपभोक्ताओं के लिए दैनिक लेनदेन पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा:
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व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P): एक खाते से दूसरे निजी खाते में ट्रांसफर पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा।
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दुकानदारों को भुगतान (P2M): 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं है। 2,000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट भुगतान पर 0.4% शुल्क लागू होगा, लेकिन इसका वहन संबंधित दुकानदार या मर्चेंट करेगा, ग्राहक नहीं।
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96% लेनदेन अप्रभावित: वित्त मंत्रालय के अनुसार लगभग 96 फीसदी यूपीआई ट्रांजैक्शन इस दायरे से बाहर रहेंगे और ग्राहकों से सीधे तौर पर कोई एमडीआर नहीं वसूला जाएगा।
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अतिरिक्त खर्च कौन उठाएगा: ब्रोकर या निवेशक?
कैपिटल मार्केट में असली पेंच इस बात पर फंसा है कि इस शुल्क की भरपाई कौन करेगा। ब्रोकरेज इंडस्ट्री में चिंता इस बात को लेकर है कि यदि कोई निवेशक ट्रेडिंग अकाउंट में यूपीआई से फंड ट्रांसफर करता है लेकिन शेयर की खरीद-फरोख्त नहीं करता, तो ब्रोकर यह लागत कैसे संभालेगा। आशीष कुमार चौहान के अनुसार, यह व्यवस्था ब्रोकर्स और ग्राहकों के आपसी तालमेल पर निर्भर करेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ब्रोकरेज फर्में इसे खुद वहन करेंगी या परोक्ष रूप से ग्राहकों पर डालेंगी।
दमदार लिस्टिंग के बाद चर्चा में एनएसई
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में 24 सितंबर को एनएसई के शेयर बीएसई पर सफलतापूर्वक लिस्ट हुए हैं। 22,561.57 करोड़ रुपये के बड़े आईपीओ के बाद कंपनी के शेयर 1,785 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 1,800 रुपये पर खुले और पहले दिन 1,818 रुपये पर बंद हुए। इस पब्लिक इश्यू में मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए करीब 12.64 करोड़ शेयर बेचे गए थे।























