नई दिल्ली:
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अल नीनो के प्रभाव के चलते सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले आईएमडी ने मानसून और अल नीनो की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करते हुए संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को पहले से योजना बनाने और सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 को जारी पहले चरण के दीर्घकालिक पूर्वानुमान में मौसमी बारिश ‘लॉन्ग पीरियड एवरेज’ (LPA) की 92% रहने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद दूसरे चरण के संशोधित पूर्वानुमान में मौसमी बारिश का अनुमान घटाकर LPA का 90% कर दिया गया। आईएमडी ने अपने मौसमी आउटलुक में स्पष्ट संकेत दिया है कि इस मानसूनी सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने की पूरी संभावना है, जिससे बारिश पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर अल नीनो की स्थिति के दौरान भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून कमजोर रहता है। वर्ष 1950 के बाद से अब तक 16 बार अल नीनो की स्थिति बनी है, जिनमें से 7 बार भारतीय मानसून की बारिश पर प्रतिकूल असर पड़ा और बारिश सामान्य से कम रही। अध्ययनों से यह भी सामने आया है कि मानसून के उत्तरार्ध, विशेष रूप से सितंबर महीने की बारिश में अल नीनो का सबसे मजबूत उल्टा असर देखने को मिलता है।
कृषि और जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए आईएमडी और भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) नियमित रूप से जानकारी साझा कर रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ‘क्रॉप वेदर वॉच’ के तहत आईएमडी हर हफ्ते पिछली बारिश और अगले दो हफ्तों का पूर्वानुमान जारी करता है। इसके अलावा पीएमओ, गृह मंत्रालय और कृषि मंत्रालय की बैठकों में नियमित रूप से जिले और ब्लॉक स्तर का डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि मंत्रालय ने अलग से कोई जिला-वार दिशानिर्देश जारी नहीं किया है, लेकिन आईएमडी द्वारा जारी मौसमी चेतावनी और लू (Heatwave) से जुड़ी जानकारियों के आधार पर राज्य सरकारें अपनी तैयारियां सुनिश्चित कर रही हैं।

