विशेष संवाददाता | रायपुर
छत्तीसगढ़ की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, दुर्लभ पांडुलिपियों और ताम्रपत्रों के संरक्षण को लेकर विधानसभा के मानसून सत्र में एक बड़ा खुलासा हुआ है। भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को डिजिटल पोर्टल पर दर्ज करने का काम तेजी से चल रहा है। विधायक श्री राघवेंद्र कुमार सिंह के ध्यानाकर्षण प्रश्न का लिखित जवाब देते हुए प्रदेश के पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सदन में इस अभियान से जुड़े विस्तृत आंकड़े पेश किए.
संस्कृति विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गत माह की स्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य से मोबाइल ऐप के माध्यम से पोर्टल पर कुल 886 प्रविष्टियां दर्ज की गई हैं, जिनमें 1,24,422 (1.24 लाख) प्राचीन पांडुलिपियां शामिल हैं.
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ज्ञान भारतम् केंद्र नई दिल्ली ने किया सत्यापन (वेरिफिकेशन)
पोर्टल पर दर्ज की गई इन प्रविष्टियों की जांच और प्रामाणिकता की समीक्षा ‘ज्ञान भारतम् केंद्र, नई दिल्ली’ द्वारा की जा रही है। केंद्र द्वारा अब तक की गई जांच की स्थिति इस प्रकार है:
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सत्यापित प्रविष्टियां (Verified): कुल 453 प्रविष्टियों को पूरी तरह सही और प्रामाणिक पाते हुए सत्यापित किया गया है, जिसके अंतर्गत 12,040 पांडुलिपियां आती हैं.
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अस्वीकृत प्रविष्टियां (Rejected): मानकों पर खरी न उतरने के कारण 433 प्रविष्टियों को रिजेक्ट (अस्वीकृत) कर दिया गया है, जिनमें 1,12,382 पांडुलिपियां शामिल थीं.
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छत्तीसगढ़ की प्राचीन पांडुलिपियों का लेखा-जोखा
| प्रविष्टि की स्थिति | कुल प्रविष्टियां (ऐप के माध्यम से) | शामिल पांडुलिपियों की संख्या |
| कुल दर्ज प्रविष्टियां | 886 | 1,24,422 |
| सत्यापित (Verified) | 453 | 12,040 |
| अस्वीकृत (Rejected) | 433 | 1,12,382 |
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मल्हार से प्राप्त बालार्जुन के ताम्रपत्रों पर भी मांगा जवाब
सदन में विधायक श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र अंतर्गत ऐतिहासिक स्थल मल्हार से प्राप्त महाशिवगुप्त बालार्जुन की प्राचीन ताम्रपट्टिकाओं (ताम्रपत्रों) की वर्तमान स्थिति, उनकी खोज के समय, लिपि और भाषा को लेकर भी संस्कृति मंत्री से विस्तृत विवरण मांगा है.
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डिजिटल संरक्षण से अमर होगी धरोहर
संस्कृति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के जरिए छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास, लोक संस्कृति, आयुर्वेद और तंत्र-मंत्र से जुड़ी सदियों पुरानी पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में हमेशा के लिए सुरक्षित कर लिया जाएगा। इससे देश-विदेश के शोधकर्ताओं और इतिहासकारों को छत्तीसगढ़ के वैभवशाली अतीत को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।

