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बिलासपुर:
छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में 595 प्राध्यापकों (प्रोफेसर) की नियमित भर्ती प्रक्रिया में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) पूरा कराने के बावजूद अंतिम चयन और नियुक्ति आदेश का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से भर्ती प्रक्रिया को आगे न बढ़ाने और हो रही देरी के कारणों पर सवाल किया।
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PSC का कोर्ट में तर्क: ‘विभाग को भेजी हैं क्वेरी, वहां से जवाब का इंतजार’
अदालत के सवाल पर लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया आयोग के स्तर पर जानबूझकर नहीं रोकी गई है।
पीएससी की ओर से बताया गया कि भर्ती और सेवा नियमों से जुड़ी कुछ तकनीकी बिंदुओं पर आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग से पत्राचार कर स्पष्टीकरण (क्वेरी) मांगा था। विभाग की तरफ से अब तक उन सवालों और स्पष्टीकरण का कोई जवाब आयोग को नहीं भेजा गया है। प्रशासनिक स्तर पर उत्तर लंबित रहने के कारण ही अंतिम चयन सूची जारी करने और भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण करने में विलंब हो रहा है।

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अभ्यर्थियों ने लगाई थी अदालत से गुहार
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में वर्षों बाद 595 पदों पर प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। पात्र अभ्यर्थी लिखित और साक्षात्कार के चरणों से गुजरते हुए अपने दस्तावेजों का सत्यापन भी करा चुके हैं।
लंबा समय बीत जाने के बाद भी अंतिम परिणाम और पदस्थापना आदेश जारी न होने से परेशान अभ्यर्थियों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद उच्च शिक्षा विभाग को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 4 सप्ताह की समय-सीमा तय कर दी है। विभाग का जवाब आने के बाद मामले में अगली सुनवाई होगी।


