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नई दिल्ली:
पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की सफलता के बाद अब केंद्र सरकार रसोई गैस में भी ब्लेंडिंग शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। घरों में पाइप के जरिए पहुंचने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) में 5 प्रतिशत तक ग्रीन हाइड्रोजन मिलाने की तैयारी की जा रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB) ने इसके लिए विस्तृत ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना और प्राकृतिक गैस के आयात पर भारत की निर्भरता को घटाना है। PNGRB ने इस मसौदे पर सभी हितधारकों से 11 नवंबर 2026 तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। नियमों को अंतिम रूप दिए जाने और सुरक्षा अनुमतियों के बाद इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू होने में 2 से 3 साल का समय लग सकता है।

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क्या महंगी होगी घरेलू PNG? लागत का गणित
पीएनजी में हाइड्रोजन मिलाने की सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती इसकी उत्पादन लागत है: सरकारी निविदाओं के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन की मौजूदा दर (जीएसटी सहित) करीब ₹387 से ₹397 प्रति किलोग्राम है। वहीं, अक्टूबर 2026 के लिए घरेलू प्राकृतिक गैस का बेंचमार्क भाव लगभग ₹1,067 प्रति MMBtu (मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) है।समान ऊर्जा क्षमता के आधार पर ग्रीन हाइड्रोजन की लागत लगभग ₹2,880 से ₹2,950 प्रति MMBtu बैठती है, जो सामान्य प्राकृतिक गैस के भाव से करीब 2.7 गुना अधिक है।
दिल्ली में घरेलू उपभोक्ता फिलहाल PNG के लिए ₹50.59 प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) चुका रहे हैं। ब्लेंडिंग के बाद गैस के दाम बढ़ेंगे या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सिटी गैस कंपनियां अतिरिक्त लागत खुद वहन करती हैं या इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा।
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कंपनियों पर बढ़ेगा इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा खर्च
हाइड्रोजन मिश्रण के लिए सिटी गैस वितरण कंपनियों को अपनी मौजूदा पाइपलाइनों, मीटरिंग और वितरण उपकरणों में जरूरी तकनीकी बदलाव करने होंगे:
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL), महानगर गैस लिमिटेड (MGL) और गेल (GAIL) जैसी कंपनियों को पाइपलाइन नेटवर्क की सुरक्षा और रिसाव निगरानी तंत्र को अपग्रेड करने के लिए अतिरिक्त पूंजी लगानी होगी। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और एलएनजी के अस्थिर वैश्विक दामों के चलते सिटी गैस कंपनियां पहले से मार्जिन के दबाव से जूझ रही हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में आईजीएल का शुद्ध मुनाफा 44% घटकर ₹238 करोड़ और एमजीएल का शुद्ध मुनाफा 39% गिरकर ₹193 करोड़ रह गया था।
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सुरक्षा पर कड़े दिशा-निर्देश: स्वतंत्र एजेंसी से करानी होगी जांच
हाइड्रोजन अत्यंत ज्वलनशील गैस है, जिसके कारण रिसाव या विस्फोट का जोखिम सामान्य गैस की तुलना में अधिक रहता है। इसे ध्यान में रखते हुए PNGRB ने सुरक्षा से जुड़े कड़े नियम तय किए हैं:
कंपनियों को हाइड्रोजन मिलाने की अनुमति के लिए आवेदन करते समय नेटवर्क की तकनीकी स्थिति, पाइपलाइन और बिलिंग सिस्टम की अनुकूलता (कंपैटिबिलिटी) से जुड़े दस्तावेज सौंपने होंगे। कंपनियों को किसी स्वतंत्र मान्यता प्राप्त तकनीकी एजेंसी से पूरे नेटवर्क की सुरक्षा और परिचालन तत्परता की ऑडिट रिपोर्ट हासिल करनी होगी। वाणिज्यिक आपूर्ति शुरू करने से पहले कंपनियों को सभी वैधानिक अनुमतियां और ‘प्री-कमीशनिंग’ सुरक्षा जांच पूरी करना अनिवार्य होगा।



