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रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी शिक्षकों के लिए आयोजित की जाने वाली टीईटी (TET) परीक्षा को लेकर विवाद गहरा गया है। विभाग द्वारा इस परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में कराने के निर्णय के बाद से राज्यभर के शिक्षक संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तमाम सरकारी शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके चलते शिक्षा विभाग ने इसे आयोजित करने का जिम्मा कर्मचारी चयन मंडल को सौंपा है। हालांकि, परीक्षा ऑनलाइन लिए जाने के फैसले ने उन वरिष्ठ शिक्षकों की नींद उड़ा दी है जो रिटायरमेंट के बेहद करीब हैं और जिन्हें ठीक से कंप्यूटर चलाना नहीं आता है।
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शिक्षक संगठनों का कड़ा विरोध
विभिन्न शिक्षक संगठनों ने ऑनलाइन परीक्षा के इस प्रारूप को पूरी तरह से अव्यवहारिक करार दिया है:
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन: के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने विभागीय टीईटी के फैसले का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों के कई वरिष्ठ शिक्षकों के पास कंप्यूटर का ज्ञान न होने के कारण तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, इसलिए ऑफलाइन परीक्षा ही सबसे बेहतर विकल्प है।
प्रदेश शिक्षक के कई शिक्षक संघ ने इस निर्णय को अव्यवहारिक बताते हुए कहा है कि बड़ी संख्या में वरिष्ठ शिक्षकों को कंप्यूटर चलाना नहीं आता, जिससे उन्हें टेस्ट देने में भारी परेशानी होगी। इसके लिए शासन से ऑफलाइन परीक्षा कराने का आग्रह किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के अध्यक्ष राठौर ने भी ऑनलाइन मोड में परीक्षा कराए जाने का कड़ा विरोध करते हुए इसे अनुचित बताया है।
दूसरी ओर, शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संयोजक विकास सिंह राजपूत ने इस बात पर राहत जताई है कि शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने के लिए दो अवसर मिलेंगे, जिससे उन्हें बार-बार असफल होने पर लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। बहरहाल, शिक्षकों की तकनीकी असमर्थता और संगठनों के विरोध के चलते अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस पर क्या नया कदम उठाता है।


