NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी छात्र को आगामी री-एग्जाम में शामिल होने की अनुमति दे दी। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि शिक्षा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और केवल आरोपों के आधार पर किसी छात्र को परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता।
मामला उस आरोपी से जुड़ा है जिसने अदालत से अंतरिम राहत की मांग करते हुए NEET-UG 2026 री-टेस्ट में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देना और मामले में दोषी या निर्दोष होने का फैसला अलग-अलग विषय हैं। जांच एजेंसियां अपना काम जारी रखेंगी और कानूनी प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा कथित पेपर लीक विवाद के बाद रद्द कर दी गई थी। मामले की जांच CBI कर रही है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाना है, जिसके लिए सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और सख्त किया गया है।
अदालत के इस फैसले को शिक्षा के अधिकार और न्यायिक संतुलन के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट ने संकेत दिया कि जब तक किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक उसे शिक्षा और परीक्षा जैसे अवसरों से पूरी तरह वंचित करना उचित नहीं होगा
