रेलवे काउंटर टिकट पर भी मिलेगा ऑनलाइन जैसा बीमा कवर: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 27 अक्टूबर से व्यवस्था लागू करने का आदेश
शराब की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से पूछा— ‘क्या आप गंभीर नहीं हैं?’
नई दिल्ली:
क्या अब वाइन शॉप, बार या पब में अपनी पसंदीदा ड्रिंक का ऑर्डर देने से पहले आपको अपनी उम्र का सरकारी पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) दिखाना होगा? देशभर में शराब बिक्री के काउंटरों पर अनिवार्य ‘एज वेरिफिकेशन’ (उम्र सत्यापन) व्यवस्था लागू करने की मांग अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गई है।
शराबबंदी और सड़क सुरक्षा पर काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन CADD (कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग) की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की गैर-हाजिरी पर कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की तीन जजों की विशेष पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए सवाल किया— “क्या वे आपको और इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं?”
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जनहित याचिका में क्या है मांग: बिना आईडी नहीं मिलेगी शराब?
याचिकाकर्ता संगठन CADD का कहना है कि भारत में शराब खरीदने की कानूनी उम्र तय होने के बावजूद दुकानों, क्लबों और रेस्तराओं में ग्राहकों की उम्र जांचने का कोई पुख्ता और पारदर्शी तंत्र नहीं है:
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काउंटर पर अनिवार्य जांच: याचिका में मांग की गई है कि शराब की दुकानों (ठेकों), बार, पब और क्लबों में उम्र सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
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25 वर्ष का नियम: सुझाव दिया गया है कि जो भी ग्राहक 25 वर्ष से कम आयु का नजर आए, शराब बेचने वाला प्रतिष्ठान उससे सरकार द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र देखकर उम्र की पुष्टि करे।
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सड़क हादसों पर लगाम: संगठन का तर्क है कि उम्र सत्यापन की ढीली व्यवस्था के चलते नाबालिगों तक शराब आसानी से पहुंच रही है, जिसके कारण कम उम्र में नशाखोरी और भीषण सड़क हादसों (ड्रंक एंड ड्राइव) की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
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सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से कोई नहीं पहुंचा, कोर्ट ने दी चेतावनी
14 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में उस समय असहज स्थिति बन गई जब नोटिस तामील होने के बावजूद केंद्र सरकार की तरफ से कोई भी सरकारी वकील पेश नहीं हुआ।

पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए मौखिक टिप्पणी की— “They don’t take you seriously?” (क्या वे आपको गंभीरता से नहीं लेते?)। याचिकाकर्ता के वकील ने सहमति जताते हुए कहा कि सरकार इस संवेदनशील विषय को लेकर लापरवाह बनी हुई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है और मामले की अगली सुनवाई 6 सप्ताह बाद तय की है।
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एक देश, लेकिन शराब की अलग-अलग उम्र: क्यों है ऐसा पेच?
भारत में शराब खरीदने और पीने की न्यूनतम कानूनी उम्र पूरे देश में एक समान नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि संविधान के तहत शराब और आबकारी (Excise) पूरी तरह से ‘राज्य सूची’ का विषय है:
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | शराब खरीदने/पीने की न्यूनतम कानूनी उम्र |
| दिल्ली | 25 वर्ष (25 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को बिक्री प्रतिबंधित) |
| तमिलनाडु | 21 वर्ष |
| उत्तर प्रदेश / मध्य प्रदेश | 21 वर्ष |
| महाराष्ट्र | 25 वर्ष (माइल्ड बीयर के लिए 21 वर्ष) |
चूंकि हर राज्य के आबकारी नियम अलग हैं, इसलिए ठेकों और बारों में कानूनी उम्र का पालन कराना हमेशा से एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहा है।
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नियम लागू हुए तो क्या-क्या बदलेगा?
यदि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सख्त गाइडलाइंस जारी कीं, तो आने वाले दिनों में शराब खरीदने का पूरा तौर-तरीका बदल सकता है:
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शराब काउंटर और बार में एंट्री के समय ग्राहकों को जन्मतिथि प्रमाणित करने वाला वैध दस्तावेज दिखाना अनिवार्य हो सकता है।
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नियमों का उल्लंघन कर नाबालिगों को शराब परोसने वाले बार, क्लब और दुकानों के लाइसेंस सीधे रद्द हो सकते हैं।
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शराब आपूर्ति और रिटेल सिस्टम में डिजिटल वेरिफिकेशन या बारकोड स्कैनिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को जोड़ना पड़ सकता है।



