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नई दिल्ली:
रेलवे आरक्षण काउंटरों से टिकट खरीदकर सफर करने वाले देश के करोड़ों आम यात्रियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने भारतीय रेलवे को कड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि 27 अक्टूबर 2026 से काउंटर से खरीदे जाने वाले सभी टिकटों पर भी ऑनलाइन (IRCTC) टिकटों के समान अनिवार्य बीमा कवर उपलब्ध कराया जाए।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने रेलवे को यह व्यवस्था लागू करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि आदेश का तय समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से पालन नहीं हुआ, तो इसके लिए रेलवे बोर्ड सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा।
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ऑनलाइन और काउंटर टिकट में भेदभाव का कोई औचित्य नहीं: पीठ
रेल यात्रा में यात्रियों की सुरक्षा और रेल दुर्घटनाओं की रोकथाम से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए:
अदालत ने कहा कि देश का एक बहुत बड़ा वर्ग, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोग, आज भी स्टेशनों पर आरक्षण काउंटर से टिकट खरीदते हैं। उन्हें इस बुनियादी वित्तीय सुरक्षा कवच से बाहर रखने का कोई तार्किक आधार नहीं है।वर्तमान में आईआरसीटीसी के जरिए मामूली प्रीमियम देकर केवल ऑनलाइन ई-टिकट बुक करने वाले यात्रियों को ही यात्रा दुर्घटना बीमा का विकल्प मिलता है, जबकि काउंटर टिकट धारक इससे पूरी तरह वंचित थे। अदालत ने याद दिलाया कि रेलवे को इस बाबत नीति बनाने के लिए पहले भी पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन 6 अक्टूबर की सुनवाई तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखने पर कोर्ट को सख्त रुख अपनाना पड़ा।

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रेलवे के लचर रवैये पर भड़का कोर्ट: 16 नवंबर को रेलवे बोर्ड तलब
सुनवाई के दौरान अदालत ने यात्रियों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर रेलवे प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर गहरी नाराजगी जताई:
पीठ ने टिप्पणी की कि रेलवे की ओर से केवल आश्वासन दिए जाते रहे हैं, जो धरातल पर प्रभावी बदलाव में तब्दील नहीं हुए। यहां तक कि सुरक्षा मद में आवंटित बजट का भी समुचित इस्तेमाल नहीं किया गया। कोर्ट सलाहकार (Amicus Curiae) वरिष्ठ अधिवक्ता शिखिल सूरी ने सुनवाई के दौरान काउंटर और ऑनलाइन टिकट यात्रियों के बीच इस असमानता का मुद्दा उठाया था, जिस पर अदालत ने केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) विक्रमजीत बनर्जी से जवाब तलब किया था।
आदेश के अनुपालन और सुरक्षा उपायों की सुस्त रफ्तार को देखते हुए पीठ ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष (Chairman) और सदस्यों को 16 नवंबर को दोपहर 3:00 बजे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आश्वासनों के अनुरूप काम न होने पर शीर्ष अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा असर प्रतिदिन साधारण और आरक्षित काउंटर टिकटों से यात्रा करने वाले लाखों दैनिक यात्रियों पर पड़ेगा, जिन्हें अब किसी भी अप्रिय घटना या दुर्घटना की स्थिति में ऑनलाइन टिकटधारकों की तरह समान वित्तीय सुरक्षा और बीमा क्लेम का अधिकार मिलेगा।


