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सुकमा:
जिले में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, मनमानी और विकास कार्यों में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। विकास कार्यों में अपेक्षित प्रगति न लाने, कार्यों की स्वीकृति में हीलाहवाली करने और ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने में कोताही बरतने के चलते कलेक्टर अमित कुमार ने बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
प्रशासन ने एक तकनीकी सहायक और तीन ग्राम रोजगार सहायकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त (बर्खास्त) कर दी हैं, जबकि दो ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया है। इस सख्त कार्रवाई से जिले के पंचायत एवं ग्रामीण विकास महकमे में हड़कंप मच गया है।
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जांच में खुली पोल: हाजिरी और मानव दिवस सृजन में घोर लापरवाही
प्रशासनिक जांच में पाया गया कि विभागीय योजनाओं के तहत न्यूनतम मानव दिवस सृजित करने और पारदर्शिता के लिए बनाए गए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप से श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में लगातार लापरवाही बरती जा रही थी। इसके अलावा विकास कार्यों को गति देने के बजाय कार्यों को ठप रखने और ग्रामीणों को समय पर रोजगार न देने की पुष्टि होने पर यह कार्रवाई की गई।
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इन कर्मचारियों पर गिरी गाज: देखें पूरी सूची
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार सेवा समाप्ति और निलंबन की कार्रवाई इस प्रकार की गई है:
सेवा से बर्खास्त (सेवा समाप्त):
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अनिल कवासी: तकनीकी सहायक, जनपद पंचायत सुकमा
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सोयम जोगेश्वर (जोगेश कुमार): ग्राम रोजगार सहायक, ग्राम पंचायत मरईगुड़ा (जनपद पंचायत कोंटा)
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सुरेन्द्र पदामी: ग्राम रोजगार सहायक, ग्राम पंचायत सिरसट्टी (जनपद पंचायत सुकमा)
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देवाराम मुचाकी: ग्राम रोजगार सहायक, ग्राम पंचायत पुसगुन्ना (जनपद पंचायत छिंदगढ़)
तत्काल प्रभाव से निलंबित:
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मड़कम लख्खा: पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत मिलमपल्ली (अतिरिक्त प्रभार: पोटकपल्ली)
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मौसम तम्मैया: पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत ढोंढरा (अतिरिक्त प्रभार: डब्बाकोंटा)
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12 नोटिस के बाद भी नहीं सुधरे तकनीकी सहायक, सीधे बर्खास्त
कार्रवाई के दौरान जनपद पंचायत सुकमा के तकनीकी सहायक अनिल कवासी के मामले में गंभीर अनुशासनहीनता सामने आई। वे न सिर्फ शासकीय कार्यों में लगातार ढिलाई बरत रहे थे, बल्कि विभागीय समीक्षा बैठकों से भी अनुपस्थित रहते थे।
जिला एवं जनपद स्तर से कुल 12 बार कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद भी उन्होंने न तो कोई जवाब प्रस्तुत किया और न ही अपने कार्य व्यवहार में कोई सुधार लाया। इसे प्रशासनिक अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा मानते हुए उन्हें सीधे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों और रोजगार योजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



