नई दिल्ली। श्रावण मास का आज तीसरा सोमवार धार्मिक दृष्टि से बेहद खास और फलदायी बन गया है। आज यानी 17 अगस्त 2026 को सावन सोमवार के पावन व्रत के साथ ही नाग पंचमी का महापर्व भी मनाया जा रहा है। भगवान शिव के गले का आभूषण माने जाने वाले नाग देवता और देवाधिदेव महादेव की एक ही दिन संयुक्त आराधना का यह संयोग भक्तों के लिए विशेष पुण्यकारी माना जा रहा है। सुबह से ही देशभर के शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
पूजा के लिए आज के शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आज महादेव की आराधना और जलाभिषेक के लिए कई शुभ मुहूर्त विद्यमान हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:24 बजे से 05:08 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक
नाग पंचमी पर बन रहा विशेष योग, प्रतिमा पूजन की अपील
श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष, राहु-केतु के अशुभ प्रभाव और सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
विशेष सावधानी: धर्मशास्त्रों और जीव विशेषज्ञों के अनुसार, जीवित सांपों को दूध पिलाने से उन्हें शारीरिक नुकसान पहुँचता है। इसलिए श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे जीवित सांपों के बजाय नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या शिवलिंग पर लिपटे प्रतीकात्मक नाग की ही विधिवत पूजा कर उन्हें दूध व नैवेद्य अर्पित करें।
सरल एवं शास्त्रोक्त शिव पूजन विधि
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प्रातः स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत व पूजा का संकल्प लें।
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अभिषेक: घर के मंदिर या शिवालय में शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) और गंगाजल से अभिषेक करें।
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सामग्री अर्पण: महादेव को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, भांग, मदार (आक) के फूल और श्वेत पुष्प अर्पित करें।
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मंत्र जाप व आरती: पूजन के दौरान निरंतर पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। अंत में शिव चालीसा का पाठ कर धूप-दीप से कपूर की आरती करें।
पूजन में इन विशेष नियमों का रखें ध्यान
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शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र खंडित (कटा-फटा) न हो। बेलपत्र का चिकना भाग हमेशा शिवलिंग की ओर स्पर्श होना चाहिए।
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भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल, केतकी के फूल और सिंदूर/रोली का प्रयोग वर्जित माना गया है।
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दिनभर मन को शांत रखें, जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान करें और सात्विक आहार का ही पालन करें।

