रायपुर: दो सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर आज पूरे छत्तीसगढ़ के पटवारी सामूहिक अवकाश लेकर एक दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं। प्रदेशभर के सभी जिला व तहसील मुख्यालयों में पटवारियों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर शासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। राजस्व पटवारी संघ, छत्तीसगढ़ के प्रांतीय आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन के माध्यम से पटवारियों ने लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को तत्काल शुरू करने तथा विभिन्न भर्ती बैचों के वेतन निर्धारण में व्याप्त गंभीर विसंगतियों के शीघ्र निराकरण की पुरजोर मांग की है।
पटवारी संघ के सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2013 के बाद से आज तक पटवारियों का प्रमोशन नहीं हुआ है, जिससे कई कर्मचारी अपनी पूरी सेवा अवधि एक ही पद पर बिताकर सेवानिवृत्त होने को मजबूर हैं। इससे कर्मचारियों के मनोबल और कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। संघ ने मांग रखी है कि प्रदेश में राजस्व निरीक्षकों (RI) की भारी कमी को देखते हुए सीधी भर्ती को पूरी तरह बंद किया जाए और 100 प्रतिशत पद पटवारियों की पदोन्नति से भरे जाएं। संघ का सुझाव है कि इनमें 50 प्रतिशत पद वरिष्ठता के आधार पर और शेष 50 प्रतिशत पद विभागीय परीक्षा के माध्यम से भरे जाने चाहिए ताकि योग्य पटवारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

इसके साथ ही संघ ने वेतन निर्धारण में व्याप्त तकनीकी व वित्तीय विसंगतियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। संघ के अनुसार, वर्ष 2010 बैच के पटवारियों के मामले में 1 जुलाई 2025 की स्थिति में ग्रेड पे 2200 से 2400 होने पर मूल वेतन 36,200 रुपये निर्धारित है, जबकि ग्रेड पे 2800 होने पर मूल वेतन घटकर 35,300 रुपये रह जाता है। ग्रेड पे बढ़ने के बावजूद मूल वेतन कम होना पूरी वेतन संरचना के सिद्धांतों के विपरीत है, जहां नियमानुसार मूल वेतन 36,400 रुपये होना चाहिए था। इसी तरह की विसंगतियां अन्य भर्ती बैचों में भी हैं, जिससे कर्मचारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और भविष्य में रिकवरी का खतरा मंडरा रहा है।
संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आज का यह एक दिवसीय सामूहिक अवकाश एवं धरना-प्रदर्शन शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए पूरी तरह अनुशासित व शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया था। यदि शासन द्वारा इन न्यायोचित मांगों पर जल्द गंभीरता से विचार कर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो प्रांतीय स्तर पर वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगे के उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल की रणनीति तय की जाएगी।
