स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर अस्पतालों में 24 घंटे आपातकालीन और ओपीडी सेवाओं का मोर्चा संभालते हैं। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ स्नातकोत्तर (पीजी) डॉक्टरों को अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम स्टाइपेंड मिल रहा है। पिछले दो वर्षों से अधिक समय से मानदेय में कोई बढ़ोतरी न होने के कारण डॉक्टरों का असंतोष अब आंदोलन की राह पर है।
15 दिनों का अल्टीमेटम और ज्ञापन अभियान
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। इसके तहत शुक्रवार को प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, सभी मंत्रियों, स्थानीय विधायकों और जिला कलेक्टरों को मांग पत्र भेजा जाएगा। जेडीए ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर शासन स्तर पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो डॉक्टर राज्यव्यापी हड़ताल और आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ काफी पीछे
डॉक्टरों का कहना है कि समान कार्यभार, लंबी नाइट ड्यूटी और अत्यधिक मानसिक दबाव के बावजूद छत्तीसगढ़ में पीजी डॉक्टरों का मानदेय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
| राज्य | वर्ष 2014 में स्टाइपेंड (₹) | वर्तमान स्टाइपेंड (₹) |
| छत्तीसगढ़ | 45,000 | 67,500 – 74,600 |
| दिल्ली | 76,000 | 1,32,336 |
| बिहार | 45,000 | 1,29,962 |
| उत्तर प्रदेश | 42,000 | 1,06,380 |
| हरियाणा | 53,000 | 1,00,980 |
| गुजरात | 50,000 | 1,00,800 |
| महाराष्ट्र | 50,000 | 92,470 |
(स्रोत: जेडीए आंकड़े)
25 सितंबर से 14 अक्टूबर तक छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 18 ट्रेनें रद्द, उत्कल एक्सप्रेस का बदलेगा मार्गजेडीए की प्रमुख मांगें:
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स्टाइपेंड में तत्काल तर्कसंगत वृद्धि और समयबद्ध रोडमैप तैयार करना।
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17 सूत्रीय मांगों के समाधान हेतु शासन स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन।
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बॉन्ड सेवा, पदस्थापना और पदोन्नति से जुड़े नियमों का त्वरित निराकरण।
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मेडिकल कॉलेज और डीएचएस (स्वास्थ्य सेवा संचालनालय) में पीजी बॉन्ड सेवा देने वाले चिकित्सकों को समान रूप से सीनियर रेजिडेंट (SR) अनुभव का लाभ देने के लिए स्पष्ट नीति निर्धारण।
जेडीए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रेशम रत्नाकर ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टर अस्पतालों में प्राथमिक और आपातकालीन सेवाओं के संचालन में अग्रणी भूमिका निभाते हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी से उनमें भारी निराशा है। यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।























