अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अब बड़ा मोड़ ले चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक जांच के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया है।
दिल्ली में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दोनों नेताओं के इस्तीफे की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने जांच प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।
18 दिन बाद दर्ज हुई FIR
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और हेराफेरी के आरोपों को लेकर करीब 18 दिनों तक जांच चलती रही। इसके बाद गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई। इस एफआईआर में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव (रामाशंकर यादव) समेत कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों पर चढ़ावे की नकदी के गबन और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
बताया जा रहा है कि SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपने के बाद पुलिस को आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की थी। रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और जांच को आगे बढ़ाया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
ट्रस्ट पर बढ़ा जवाबदेही का दबाव
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ गया था। इसी बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि जांच अभी जारी है और किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

