रायपुर: सावन के पवित्र महीने में पूरा छत्तीसगढ़ शिवमय हो चुका है। मंदिरों और प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही आस्था का अटूट सैलाब देखने को मिल रहा है। दूर-दूर से कांवड़ियों और शिवभक्तों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। सावन के दूसरे सोमवार पर इस बार बेहद खास और दुर्लभ धार्मिक संयोग बना है—लगभग 6 साल बाद सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक साथ पड़े हैं। इस पावन अवसर पर प्रदेशभर में सुबह से ही जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी हुई है।
शिवालयों में गूंजे बम-भोले के नारे
राजधानी रायपुर के प्रमुख शिव मंदिरों में तड़के से ही कतारें लग गई थीं। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं।
वहीं, गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर स्थित ऐतिहासिक फणीकेश्वर नाथ महादेव मंदिर में भी भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है। पूरे मंदिर प्रांगण में ‘बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंज रहे हैं, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।
जशपुर में भव्य कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक
जशपुर जिले में भी सावन के दूसरे सोमवार की धूम रही। श्रद्धालुओं ने पक्कीडाड़ी से पवित्र जल उठाकर कांवड़ यात्रा निकाली और लोरो स्थित भीमामहादेव शिव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक किया। इस दौरान प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की गई।
जशपुर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों—कैलाश गुफा, चराईडांड शिव मंदिर, कोतेबीरा धाम और किलकिलेश्वर धाम (किलकिला) में सुबह से ही भक्तों की लंबी लाइनें देखने को मिलीं।
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध और पौराणिक शिव मंदिर
सावन के इस पावन महीने में राज्य के प्राचीन और ऐतिहासिक शिवालयों में विशेष दर्शन-पूजन का दौर जारी है:
- कुलेश्वर महादेव मंदिर (राजिम, रायपुर): 9वीं शताब्दी का ऐतिहासिक मंदिर।
- भोरमदेव मंदिर (कबीरधाम): छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहे जाने वाला एक हजार वर्ष पुराना मंदिर।
- लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर (शिवरीनारायण, जांजगीर-चांपा): 6वीं शताब्दी की प्राचीन धरोहर।
- भूतेश्वर महादेव मंदिर (मरोदा, गरियाबंद): प्राकृतिक रूप से बढ़ने वाले विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध।
- सुरंग टीला मंदिर (सिरपुर, महासमुंद): 7वीं शताब्दी का स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना।
- पातालेश्वर/केदारेश्वर महादेव (मल्हार, बिलासपुर): 12वीं से 14वीं शताब्दी के प्राचीन मंदिर।
- देवबलोदा का प्राचीन शिव मंदिर (पाटन, दुर्ग): 14वीं शताब्दी का एतिहासिक शिवालय।
- महादेव मंदिर (पाली, कोरबा): 8वीं–9वीं शताब्दी का दर्शनीय केंद्र।
- अन्य प्रमुख मंदिर: अडभार (शक्ति), गतौरा व बेलपान (बिलासपुर), नारायणपुर (बलौदाबाजार) और जगदलपुर का प्राचीन महादेव मंदिर।
प्रदेशभर के इन सभी पौराणिक व स्थानीय शिव धामों में सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु सुगमता से दर्शन और जलाभिषेक कर सकें।

