इंदौर:
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी सेवा की परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) में कर्मचारियों को तीन वर्षों तक क्रमशः 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने के नियम पर कड़ा रुख अपनाते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग स्टाफ के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने शासन की इस व्यवस्था को अनुचित मानते हुए निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता नर्सिंग कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि के दौरान लागू वेतनमान का पूरा न्यूनतम वेतन प्रदान किया जाए।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांगें
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पदस्थ नर्सिंग कर्मियों ने नियुक्ति आदेश में शामिल उस विवादित शर्त को चुनौती दी थी, जिसके तहत परिवीक्षा अवधि के:प्रथम वर्ष में: 70% वेतन,द्वितीय वर्ष में: 80% वेतन, तृतीय वर्ष में: 90% वेतन दिया जा रहा था।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि: इस नियम को रद्द किया जाए।नियुक्ति तिथि से ही पूरे प्रोबेशन काल के लिए निर्धारित वेतनमान का न्यूनतम वेतन दिया जाए।पिछले समय में काटी या रोकी गई वेतन राशि का बकाया (एरियर) ब्याज और अन्य वित्तीय लाभों सहित भुगतान कराया जाए।
शासन का विरोध और कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का हवाला देते हुए याचिका खारिज करने की दलील दी गई।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के पक्ष ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट पूर्व में भी इसी तरह के मामले में व्यवस्था दे चुका है, जिसमें प्रतिशत के आधार पर वेतन में कटौती करने को गलत माना गया था।
तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिशत के आधार पर वेतन देने की व्यवस्था को अदालत पहले ही अनुचित ठहरा चुकी है। ऐसे में शासन याचिकाकर्ता नर्सिंग स्टाफ को परिवीक्षा अवधि के दौरान लागू न्यूनतम वेतनमान के अनुसार ही पूरा वेतन भुगतान करे।


