रायपुर:
जमीन की नपाई करानी हो तो इंतजार, जाति-निवास प्रमाणपत्र बनवाना हो तो इंतजार और बारिश-बाढ़ से बर्बाद फसल के मुआवजे का आकलन कराना हो तो भी इंतजार। छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर 13 अक्टूबर से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल ने आम जनता और किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर चल रहे इस प्रदर्शन के कारण प्रदेशभर की तहसीलों और राजस्व कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह चरमरा गया है।
जमीनी विवाद और अदालती सुनवाई पर ब्रेक
पटवारियों के बस्ता जमा कर हड़ताल पर चले जाने से जमीन की नाप-जोख, सीमांकन और स्थल निरीक्षण के मामले पूरी तरह अटक गए हैं।
तहसील कार्यालयों और राजस्व न्यायालयों में उन सभी प्रकरणों की सुनवाई व आदेश रुक गए हैं, जिनमें पटवारी प्रतिवेदन (रिपोर्ट) अनिवार्य होता है।पहले से लंबित राजस्व प्रकरणों का बैकलॉग और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
जाति-निवास के लिए भटक रहे छात्र और युवा
सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, स्कूल-कॉलेज प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र बनवाने वाले आवेदकों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। आवेदन जमा होने के बावजूद पटवारी की सत्यापन रिपोर्ट न मिलने से फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। तय समयसीमा में दस्तावेज जमा करने की बाध्यता वाले अभ्यर्थियों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
धान खरीदी से पहले गिरदावरी और डिजिटल सर्वे पर असर
आगामी धान खरीदी सीजन को देखते हुए गिरदावरी का काम अंतिम चरण में था। आंकड़ों के मुताबिक:
प्रदेश में करीब 90 से 95 प्रतिशत गिरदावरी पूरी हो चुकी है, लेकिन शेष 5 से 10 प्रतिशत काम हड़ताल की भेंट चढ़ गया है।नए पीवी (PV) ऐप के जरिए चल रहे डिजिटल फसल सर्वे और सत्यापन का काम भी लगभग 40 से 50 प्रतिशत पर ही अटक गया है। यदि हड़ताल लंबी खिंची, तो धान खरीदी के दौरान रकबा सत्यापन को लेकर गंभीर विसंगतियां सामने आ सकती हैं।
इसके साथ ही, हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित फसलों के नुकसान का सर्वे भी बीच में रुक गया है, जिससे किसानों को मिलने वाली तात्कालिक राहत और मुआवजे की प्रक्रिया लटक गई है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
राजस्व पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष भागवत कश्यप का कहना है कि नए पीवी ऐप के माध्यम से डिजिटल फसल सर्वे और भौतिक सत्यापन करने में गंभीर तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं आ रही हैं। जब तक शासन स्तर पर इन विसंगतियों और तकनीकी खामियों का ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, शासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल न होने से गतिरोध बरकरार है।


