नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने टीकाकरण पर सवाल उठाने वाले याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यह देश की लाखों बेटियों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है, जिसे किसी भी सूरत में बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने याचिका पर तीखी टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वे याचिका वापस लेना चाहते हैं या अदालत से इस पर कोई विपरीत टिप्पणी दर्ज कराना चाहते हैं। पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि अदालत को कठोर आदेश पारित करने के लिए विवश न किया जाए। यदि याचिकाकर्ता पेशे से डॉक्टर हैं, तो उनका ऐसा रुख और भी चिंताजनक तथा आपत्तिजनक है, क्योंकि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चलाए जा रहे इतने बड़े सुरक्षात्मक कदम को रोकने का प्रयास कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी दुर्लभ मामले में गलत तरीके से टीकाकरण या किसी दुष्प्रभाव की बात सामने आती है, तो उसके लिए मुआवजे और कानून के सामान्य नियम पहले से मौजूद हैं और वही लागू होंगे। इसके आधार पर पूरे राष्ट्रव्यापी अभियान पर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते। शीर्ष अदालत के कड़े रुख और नाराजगी को देखते हुए इस जनहित याचिका पर विचार करने से मना कर दिया गया।























