नई दिल्ली: NEET UG परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने NTA से पूछा है कि परीक्षा सुधारों को जमीन पर लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की सिफारिशों के क्रियान्वयन पर विस्तृत जानकारी मांगी है। NTA को तीन सप्ताह के भीतर नया हलफनामा दाखिल करना होगा। यह कदम NEET UG 2026 और आने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
NEET Exam Reform पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि NEET Exam Reform केवल दस्तावेजों और रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कोर्ट यह जानना चाहता है कि परीक्षा प्रणाली में सुझाए गए बदलाव वास्तव में किस स्तर तक लागू हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से दो समितियों की सिफारिशों पर जवाब मांगा है:
- राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा और NTA की कार्यप्रणाली में सुधार सुझाए थे।
- नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स ने परीक्षा व्यवस्था में तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर जोर दिया था।
- NTA को दोनों की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामे में देनी होगी।
NTA ने बताया परीक्षा का सुरक्षा सिस्टम
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। सरकार की ओर से बताया गया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में कई स्तर की सुरक्षा अपनाई जाती है।
इस व्यवस्था में बड़ा Question Bank, कई मॉडरेटरों की भूमिका और प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहनों की Real-Time GPS Tracking शामिल है। सरकार का कहना है कि प्रश्नपत्र की छपाई और वितरण प्रक्रिया में भी मल्टी-लेयर सिक्योरिटी लागू है।
NEET UG 2026 के लिए क्यों अहम है यह सुनवाई?
Supreme Court on NEET की यह कार्रवाई लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पेपर सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और NTA की जवाबदेही सीधे छात्रों के भविष्य से जुड़ी हैं। ऐसे में कोर्ट का जोर इस बात पर है कि सुधार स्थायी और प्रभावी व्यवस्था का हिस्सा बनें।
NEET परीक्षा में भरोसा बनाए रखने के लिए सिर्फ सुरक्षा दावों से ज्यादा जरूरी है कि सुधारों का असर जमीन पर दिखाई दे। अब NTA के नए हलफनामे से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की सिफारिशों पर वास्तव में कितना काम हुआ है।























