नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ स्थित तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी को लेकर मीडिया में आ रही खबरों को भ्रामक और अधूरा करार देते हुए स्थिति स्पष्ट की है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, तारा (संशोधित) ब्लॉक की नीलामी 2023 के बाद हुए महत्वपूर्ण प्रशासनिक व भौगोलिक बदलावों और राज्य सरकार की अनुशंसा के आधार पर ही पूरी की गई है।
2023 में क्यों हटाया गया था ब्लॉक?
जुलाई 2023 में वाणिज्यिक नीलामी के सातवें चरण के दौरान तारा कोयला ब्लॉक को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। उस समय छत्तीसगढ़ सरकार ने हसदेव अरण्य क्षेत्र के उन कोयला ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने का अनुरोध किया था, जो लेमरू एलीफेंट (हाथी) कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आ रहे थे। राज्य की चिंताओं का सम्मान करते हुए केंद्र ने उस समय इस ब्लॉक की नीलामी रोक दी थी।
राज्य सरकार की हरी झंडी और सीमाओं में संशोधन
11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर तारा ब्लॉक को नीलामी में शामिल करने की सिफारिश की। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि यह ब्लॉक लेमरू हाथी कॉरिडोर के बाहर पड़ता है। इसके बाद सीएमपीडीआईएल (CMPDIL) द्वारा ब्लॉक की सीमाओं को संशोधित कर हाथी कॉरिडोर के प्रभाव वाले पूरे क्षेत्र को इससे पूरी तरह अलग किया गया। इसके बाद इसे ‘तारा (संशोधित)’ नाम से वाणिज्यिक नीलामी के 15वें दौर में रखा गया।
सफल नीलामी, राजस्व और रोजगार
संशोधित ब्लॉक को लेकर बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धा देखने को मिली और इसके लिए कुल 9 बोलियां प्राप्त हुईं। 37.50% की राजस्व हिस्सेदारी पर इस ब्लॉक की नीलामी सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। इस परियोजना से राज्य सरकार को हर साल 1200 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलने की उम्मीद है, साथ ही 8000 से अधिक लोगों के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।























