बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के मुहाने पर खड़े आबकारी विभाग के एक हेड कांस्टेबल को बड़ी राहत दी है। अदालत ने शासन को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को उसके गृह जिले बिलासपुर में पदस्थ किया जाए। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पहले उनकी पसंद या गृह जिले में पदस्थापना का लाभ दिया जाता रहा है, तो इस मामले में भी याचिकाकर्ता को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। यह आदेश जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने आबकारी हेड कांस्टेबल नेल्सन लवेट की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
बीमार पत्नी की देखभाल और गृह जिले के लिए सालों से कर रहे थे मांग
मामले के अनुसार, नेल्सन लवेट की नियुक्ति वर्ष 1993 में आबकारी विभाग में हुई थी, जिसके बाद उन्हें कांस्टेबल पद पर नियमित किया गया। वर्ष 2014 में उनका तबादला कोरबा से बिलासपुर हुआ, लेकिन जून 2022 में उन्हें बिलासपुर से रायगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने विभाग को कई बार अभ्यावेदन देकर बताया कि उनकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हैं और उनका निरंतर उपचार चल रहा है, इसलिए उन्हें गृह जिले बिलासपुर में पदस्थ किया जाए। अगस्त 2023 में हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति मिलने के बाद भी उन्हें रायगढ़ में ही रखा गया। पूर्व में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद विभाग ने उनके कई आवेदनों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया।
शासन की दलील को अदालत ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से तर्क दिया गया कि 5 जून 2025 की स्थानांतरण नीति आबकारी, पुलिस, परिवहन और शिक्षा जैसे विभागों पर लागू नहीं होती, इसलिए नीति की कंडिका 3.12 के तहत गृह जिले में पदस्थापना का कोई कानूनी या निहित अधिकार नहीं बनता। कोर्ट ने शासन की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता जुलाई 2027 में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। चूंकि अन्य विभागों में सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को गृह जिले में पदस्थापना का लाभ मिलता रहा है, इसलिए याचिकाकर्ता भी इसी आधार पर राहत पाने का हकदार है।























