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नई दिल्ली
भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देते हुए देश में ही निर्मित पहली 15 मीटर लंबी मल्टी-एक्सल स्लीपर बसों को सड़कों पर उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने आधुनिक सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के तहत देश की पहली छह 15 मीटर लंबी स्वदेशी स्लीपर बसों को आधिकारिक सर्टिफिकेशन जारी कर दिया है। केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नए AIS-119 और AIS-153 सुरक्षा मानकों पर आधारित इन बसों में यात्रा के दौरान टूटी सड़कों पर भी झटके महसूस नहीं होंगे और बाहरी शोर-शराबा भी केबिन में नहीं पहुंचेगा।
मानेसर (हरियाणा) में आयोजित एक समारोह में, ICAT के निदेशक श्री सौरभ दलेला ने सिनाटी ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री नरेश कुमार यादव को औपचारिक रूप से यह प्रतिष्ठित प्रमाण-पत्र सौंपा। यह देश में यात्री परिवहन श्रेणी में प्रमाणित सबसे लंबी बस बॉडी संरचनाओं में से एक है।
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लंबी दूरी की यात्रा के लिए आरामदायक और सुरक्षित संरचना
सिनाटी ऑटोमोटिव द्वारा विकसित इस 15-मीटर लंबी बस को विशेष रूप से लंबी दूरी के सफर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान वाहन की संरचनात्मक मजबूती, आपातकालीन निकास सुरक्षा, आग से बचाव के इंतजाम, यात्रियों की आसान आवाजाही और सफर के दौरान आराम जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की गहन जांच की गई।यह बस दो प्रमुख वेरिएंट्स में उपलब्ध होगी:
1. पूरी तरह से स्लीपर: इसमें कुल 42 स्लीपर बर्थ की क्षमता है।
2. हाइब्रिड (मिक्स): इसमें 21 स्लीपर बर्थ के साथ 42 सीटें दी गई हैं।
ICAT और उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
इस अवसर पर ICAT के निदेशक श्री सौरभ दलेला ने कहा कि यह प्रमाणन उन्नत यात्री वाहनों की जांच और होमोलोगेशन (प्रमाणन) के मामले में ICAT की तकनीकी विशेषज्ञता को साबित करता है। यह सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीकी रूप से उन्नत परिवहन समाधान विकसित करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।सिनाटी ऑटोमोटिव के प्रबंध निदेशक श्री नरेश कुमार यादव ने प्रमाणन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि लंबी दूरी के यात्री परिवहन के लिए सुरक्षित और आरामदायक समाधान विकसित करने की उनकी कंपनी की कोशिशों को और मजबूती देगी।
यह कदम भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और सड़क सुरक्षा मानकों को उन्नत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
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