महुआ,सरई के फूल और आम के बौर की रसीली खुशबू से जंगल बना कुदरत का असली मयखाना!
जन्मदिन विशेष: अर्चना थमास
”हवाएँ कितनी भी खिलाफ हों, चिराग जलना जानते हैं, वो मंज़िल पा ही लेते हैं, जो संघर्ष के रास्तों पर चलना जानते हैं।”
छत्तीसगढ़ की राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सत्ता के समीकरणों से नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा की स्पष्टता से पहचाने जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है यू. डी. मिंज का। एक मैकेनिकल इंजीनियर, जिसने सरकारी विभाग की सुरक्षित चारदीवारी और पद की गरिमा को सिर्फ इसलिए त्याग दिया ताकि वह जशपुर की माटी और वहां के लोगों के संघर्ष का हिस्सा बन सके। आज 2026 में, जब वे जशपुर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में अपना सफल कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, उनका व्यक्तित्व केवल एक नेता का नहीं, बल्कि एक ‘विज़नरी शिल्पी’ का हो चुका है।
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2 मार्च 1967 को जशपुर के जोकारी गांव में जन्मे यू. डी. मिंज के जीवन की नींव न्याय और सिद्धांतों पर रखी गई थी। उनके व्यक्तित्व में न्याय और सेवा के संस्कार उनके न्यायाधीश माता-पिता से विरासत में मिले। भोपाल के प्रतिष्ठित एम.ए.सी.टी. से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उनके सामने एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य था।
महुआ,सरई के फूल और आम के बौर की रसीली खुशबू से जंगल बना कुदरत का असली मयखाना!
उन्होंने सरकारी सेवा की शुरुआत भी की, लेकिन उनका मन दफ्तर की फाइलों में नहीं, बल्कि कुनकुरी की गलियों और वहां की जनता की समस्याओं में रमता था। महज चार-पांच वर्षों में ही उन्होंने नौकरी को अलविदा कह दिया और सीधे जनता के बीच उतर गए। यह फैसला उनके अटूट संकल्प का परिचायक था कि वे व्यवस्था के भीतर रहकर नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलकर समाज की सेवा करना चाहते थे।
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”अभेद्य किलों को ढहाकर, जिसने परिवर्तन का परचम लहराया,
सियासत में वो चेहरा, जिसने सिर्फ जनसेवा का धर्म निभाया।”
जशपुर की राजनीति दशकों तक भाजपा का अभेद्य किला मानी जाती रही, 2018 के विधानसभा चुनाव में यू. डी. मिंज ने इतिहास की नई इबारत लिखी। उन्होंने अपनी कर्मभूमि कुनकुरी में 35 वर्षों के राजनैतिक वनवास को खत्म करते हुए कांग्रेस का परचम लहराया। यह केवल एक चुनावी जीत नहीं थी, बल्कि जशपुर की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात था। उनकी मेहनत और जनता के साथ अटूट जुड़ाव ने साबित किया कि संघर्ष के रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति ही बड़े बदलाव ला सकता है।
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”छोड़ी सरकारी कुर्सी,
चुना जनता का साथ ,
तकनीकी सोच और धरातल के संघर्ष का ये संगम खास।”
चुनावों में हार और जीत लोकतंत्र के दो पहलू हैं, लेकिन यू. डी. मिंज ने हार को भी एक बड़े अवसर में बदल दिया। 2025 में जब उन्हें जशपुर जिला कांग्रेस की कमान सौंपी गई, तो उन्होंने अपनी तकनीकी सोच का इस्तेमाल संगठन को बूथ स्तर पर पुनर्जीवित करने में किया। आज 2026 में जिले का हर कार्यकर्ता खुद को गौरवान्वित महसूस करता है। उन्होंने संगठन के भीतर एकता का एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहे है, जो आने वाले समय के लिए एक मिसाल बनेगा,उनका यह सफर एक विजनरी नेतृत्व का प्रमाण है जिसने जशपुर की राजनैतिक तासीर को बदल कर रख दिया।
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”हाथों में हुनर इंजीनियर का,
दिल में जशपुर का अरमान,
पर्यटन और एग्रो-टूरिज्म की सोंच रखकर
लिख रहे विकास की नई दास्तान।”
यू. डी. मिंज केवल पारंपरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहे। वे एक आधुनिक और समृद्ध जशपुर की परिकल्पना के प्रणेता हैं। उन्होंने जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता को ‘पर्यटन’ के वैश्विक नक्शे पर लाने और यहां की उपजाऊ जमीन को ‘आधुनिक कृषि’ व ‘एग्रो-टूरिज्म’ से जोड़ने की वकालत की है। उनकी सोच है कि जशपुर का किसान सिर्फ खेती न करे, बल्कि उद्यमी बने। एग्रो-टूरिज्म के जरिए वे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के नए द्वार खोलने के प्रबल समर्थक हैं। उनका ‘नया जशपुर विजन’ तकनीक और प्रकृति के संतुलन पर आधारित है।
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धर्म से ऊपर कर्म की पहचान
यू. डी. मिंज की लोकप्रियता का सबसे बड़ा राज उनकी सर्वसमावेशी सोच है। हिंदू बहुल क्षेत्र में एक ईसाई के रूप में उनकी व्यापक स्वीकार्यता यह साबित करती है कि जनता ने उनके धर्म को नहीं, बल्कि उनके विकास कार्यों और ईमानदारी को प्राथमिकता दी है। विधायक न रहते हुए भी वे आज जशपुर की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। विपक्ष के बड़े नेता भी उनकी सांगठनिक क्षमता और जनता के बीच उनकी गहरी पैठ से अचंभित रहते हैं।
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”विरासत नहीं, अपनी मेहनत से जो इतिहास रचते हैं,
मिंज वही शख्स हैं, जो हर दिल में बसते हैं।”
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर पूरा जशपुर और शुभचिंतक उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है। संघर्ष के रास्ते पर अडिग रहने वाले यू. डी. मिंज का सफर यह सिखाता है कि अगर आपके इरादे चट्टान की तरह मजबूत हों, तो आप न केवल चुनाव जीतते हैं, बल्कि जनता का स्थायी विश्वास भी जीतते हैं।
जशपुर के विकास के लिए उनका समर्पण आज भी वैसा ही है जैसा एक युवा इंजीनियर के रूप में नौकरी छोड़ते समय था।
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