वर्टिकल स्प्रिंग’, एक जिला, दो दुनिया :कहीं आम,महुआ और सरई की गंध, तो कहीं कोहरे का पहरा ! जानिए क्यों थम जाती है वसंत की रफ्तार………

महुआ,सरई के फूल और आम के बौर की रसीली खुशबू से जंगल बना कुदरत का असली मयखाना!

जन्मदिन विशेष: अर्चना थमास

​”हवाएँ कितनी भी खिलाफ हों, चिराग जलना जानते हैं, वो मंज़िल पा ही लेते हैं, जो संघर्ष के रास्तों पर चलना जानते हैं।”

छत्तीसगढ़ की राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सत्ता के समीकरणों से नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा की स्पष्टता से पहचाने जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है यू. डी. मिंज का। एक मैकेनिकल इंजीनियर, जिसने सरकारी विभाग की सुरक्षित चारदीवारी और पद की गरिमा को सिर्फ इसलिए त्याग दिया ताकि वह जशपुर की माटी और वहां के लोगों के संघर्ष का हिस्सा बन सके। आज 2026 में, जब वे जशपुर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में अपना सफल कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, उनका व्यक्तित्व केवल एक नेता का नहीं, बल्कि एक ‘विज़नरी शिल्पी’ का हो चुका है।

जशपुर की आबोहवा में छिपा है छत्तीसगढ़ का नया ‘एग्रो-स्वर्ग’”, बस पहल की जरुरत

CG NOW :लोकल से ग्लोबल तक का सफर: डिजिटल मीडिया में ऐतिहासिक छलांग: 1.9 करोड़ इंटरैक्शन के साथ भरोसे का नया मानक

विरासत की थाप: मांदर की गूँज और धवई के रंगों के साथ जीवंत आदिवासी संस्कृति’ ,जंगलों में आज भी पलाश की खुशबू से महकती है आदिवासियों की असली होली

पाताल के पानी पर ‘डिजिटल’ पहरा: अब सेंसर बताएंगे जमीन के नीचे का हाल, जल संकट से निपटने के लिए देश में बिछा टेलीमेट्री का जाल

स्वाद में बेमिसाल, कीमत में कमाल: जशपुर का ‘देसी किंग’, मटन-चिकन के शौकीन भी इसके मुरीद!

2 मार्च 1967 को जशपुर के जोकारी गांव में जन्मे यू. डी. मिंज के जीवन की नींव न्याय और सिद्धांतों पर रखी गई थी। उनके व्यक्तित्व में न्याय और सेवा के संस्कार उनके न्यायाधीश माता-पिता से विरासत में मिले। भोपाल के प्रतिष्ठित एम.ए.सी.टी. से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उनके सामने एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य था।

न मलाई, न पनीर, कुदरत का ‘सुपरफूड’:देशी तड़का, सूप और सुकटी में छिपा है सेहत का खजाना।” आखिर क्यों दीवाने हैं इसके लिए शहर और गाँव ?

 

महुआ,सरई के फूल और आम के बौर की रसीली खुशबू से जंगल बना कुदरत का असली मयखाना!

उन्होंने सरकारी सेवा की शुरुआत भी की, लेकिन उनका मन दफ्तर की फाइलों में नहीं, बल्कि कुनकुरी की गलियों और वहां की जनता की समस्याओं में रमता था। महज चार-पांच वर्षों में ही उन्होंने नौकरी को अलविदा कह दिया और सीधे जनता के बीच उतर गए। यह फैसला उनके अटूट संकल्प का परिचायक था कि वे व्यवस्था के भीतर रहकर नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलकर समाज की सेवा करना चाहते थे।

स्वाद और सेहत की अनमोल विरासत: विलुप्त होता औषधीय गुणों का खजाना ‘बड़हर’

दवा नहीं, वरदान है ‘पुटकल’:साल में सिर्फ 60 दिन का मेहमान: डायबिटीज से लेकर पेट के रोगों तक, कुदरत की इस ‘लाल पोटली’ में छिपा है हर इलाज”, ” चखिए उस ‘पुटकल’ का स्वाद, जिसके मुरीद हुए बड़े-बड़े शेफ”

सुरों के सन्यासी बुद्धमनः जिनकी लहराती आवाज और सुर से हवा गुनगुनाती है,माटी महकती है और पहाड़ थिरकते हैं, लोगों की धड़कनें तेज हो जाती है, जशपुर की खुशबू और छोटा नागपुर का गौरव

​”अभेद्य किलों को ढहाकर, जिसने परिवर्तन का परचम लहराया,
सियासत में वो चेहरा, जिसने सिर्फ जनसेवा का धर्म निभाया।”

जशपुर की राजनीति दशकों तक भाजपा का अभेद्य किला मानी जाती रही, 2018 के विधानसभा चुनाव में यू. डी. मिंज ने इतिहास की नई इबारत लिखी। उन्होंने अपनी कर्मभूमि कुनकुरी में 35 वर्षों के राजनैतिक वनवास को खत्म करते हुए कांग्रेस का परचम लहराया। यह केवल एक चुनावी जीत नहीं थी, बल्कि जशपुर की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात था। उनकी मेहनत और जनता के साथ अटूट जुड़ाव ने साबित किया कि संघर्ष के रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति ही बड़े बदलाव ला सकता है।

रामझूलवा ‘: मौन हुई ‘चरर-चरर’ की आवाज़, आधुनिकता की भेंट चढ़ी जतरा मेलों की पुरानी, पहचान,ग्रामीण संस्कृति का एक युग समाप्त

मोहब्बत का ‘देसी वर्जन’: जहाँ सादगी ही सबसे बड़ा श्रृंगार और सरई ही सबसे बड़ा उपहार है

​”छोड़ी सरकारी कुर्सी,
चुना जनता का साथ ,
तकनीकी सोच और धरातल के संघर्ष का ये संगम खास।”

चुनावों में हार और जीत लोकतंत्र के दो पहलू हैं, लेकिन यू. डी. मिंज ने हार को भी एक बड़े अवसर में बदल दिया। 2025 में जब उन्हें जशपुर जिला कांग्रेस की कमान सौंपी गई, तो उन्होंने अपनी तकनीकी सोच का इस्तेमाल संगठन को बूथ स्तर पर पुनर्जीवित करने में किया। आज 2026 में जिले का हर कार्यकर्ता खुद को गौरवान्वित महसूस करता है। उन्होंने संगठन के भीतर एकता का एक ऐसा ढांचा तैयार कर रहे है, जो आने वाले समय के लिए एक मिसाल बनेगा,उनका यह सफर एक विजनरी नेतृत्व का प्रमाण है जिसने जशपुर की राजनैतिक तासीर को बदल कर रख दिया।

पेड़ की कलियों का जलवा! ₹1200 किलो बिकती है यह ‘राजसी’ भाजी; स्वाद ऐसा कि नॉन-वेज भूल जाएंगे लोग, जानें छत्तीसगढ़ की इस ‘जादुई’ सब्जी का राज

चेतावनी: रेगिस्तान बनने की राह पर ‘छत्तीसगढ़ का स्विट्जरलैंड’, जशपुर का पाताल हुआ प्यासा

कलंक मिटा, अब बढ़ रहा मान: जशपुर में वैज्ञानिक नवाचार से ‘अमृत’ बना महुआ, नशा नहीं अब दे रहा पोषण और सम्मान

​”हाथों में हुनर इंजीनियर का,
दिल में जशपुर का अरमान,
पर्यटन और एग्रो-टूरिज्म की सोंच रखकर
लिख रहे विकास की नई दास्तान।”

यू. डी. मिंज केवल पारंपरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहे। वे एक आधुनिक और समृद्ध जशपुर की परिकल्पना के प्रणेता हैं। उन्होंने जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता को ‘पर्यटन’ के वैश्विक नक्शे पर लाने और यहां की उपजाऊ जमीन को ‘आधुनिक कृषि’ व ‘एग्रो-टूरिज्म’ से जोड़ने की वकालत की है। उनकी सोच है कि जशपुर का किसान सिर्फ खेती न करे, बल्कि उद्यमी बने। एग्रो-टूरिज्म के जरिए वे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के नए द्वार खोलने के प्रबल समर्थक हैं। उनका ‘नया जशपुर विजन’ तकनीक और प्रकृति के संतुलन पर आधारित है।

नया दौर: “महुआ 2.0: शराब की पुरानी छवि को अलविदा, अब पैमाने से बाहर निकल कर हर सुबह आपके चाय के कप में मिठास घोलेगा ‘जंगल का सोना’।”

चुनौतियों के पाले में तपकर निखरा जशपुर का ‘लाल हीरा’, अब ग्लोबल मार्केट पर नजर

धर्म से ऊपर कर्म की पहचान

यू. डी. मिंज की लोकप्रियता का सबसे बड़ा राज उनकी सर्वसमावेशी सोच है। हिंदू बहुल क्षेत्र में एक ईसाई के रूप में उनकी व्यापक स्वीकार्यता यह साबित करती है कि जनता ने उनके धर्म को नहीं, बल्कि उनके विकास कार्यों और ईमानदारी को प्राथमिकता दी है। विधायक न रहते हुए भी वे आज जशपुर की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। विपक्ष के बड़े नेता भी उनकी सांगठनिक क्षमता और जनता के बीच उनकी गहरी पैठ से अचंभित रहते हैं।

पिठारू कांदा: छत्तीसगढ़ के जंगलों का ‘प्राकृतिक उपहार’ और आदिवासियों का पारंपरिक स्वाद

झरनों के जिला में ‘शुद्धता’ की क्रांति: जशपुर की पहाड़ियों से घर की टोटी तक अब लैब का सख्त पहरा!

​”होली पर खगोलीय संयोग: 3 मार्च को दिखेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण

​”विरासत नहीं, अपनी मेहनत से जो इतिहास रचते हैं,
मिंज वही शख्स हैं, जो हर दिल में बसते हैं।”

आज उनके जन्मदिन के अवसर पर पूरा जशपुर और शुभचिंतक उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है। संघर्ष के रास्ते पर अडिग रहने वाले यू. डी. मिंज का सफर यह सिखाता है कि अगर आपके इरादे चट्टान की तरह मजबूत हों, तो आप न केवल चुनाव जीतते हैं, बल्कि जनता का स्थायी विश्वास भी जीतते हैं।
जशपुर के विकास के लिए उनका समर्पण आज भी वैसा ही है जैसा एक युवा इंजीनियर के रूप में नौकरी छोड़ते समय था।

विरासत की थाप: मांदर की गूँज और धवई के रंगों के साथ जीवंत आदिवासी संस्कृति’ ,जंगलों में आज भी पलाश की खुशबू से महकती है आदिवासियों की असली होली

आदिवासी अंचलों में कुछ इस तरह मनता है फगुआ” ……………..

“हवाओं के रुख मोड़ने का हुनर जानते थे वो, जशपुर की आन और जनता की शान थे वो। जंग चाहे सियासत की हो या धर्म की ‘समीर’, मौत से भी न डरे, ऐसे ‘युद्धवीर’ थे वो!”

मार्च 2026: आस्था और उल्लास का महीना, होली से लेकर चैत्र नवरात्रि तक त्योहारों की धूम

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version