चंडीगढ़
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों नौनिहालों के दोपहर के निवाले पर तकनीकी और प्रशासनिक फेरबदल का ग्रहण लग गया है। प्रदेश के करीब 12 हजार प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में पिछले 6 महीनों (अप्रैल से सितंबर) से केंद्र सरकार के हिस्से का मिड-डे मील फंड जारी नहीं हुआ है। बकाया आंकड़ा करीब ₹70 करोड़ तक जा पहुंचा है। आलम यह है कि सरकारी दावों के उलट, स्कूलों में बच्चों का पेट भरने के लिए मास्टरजी को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है या फिर परचून और डेयरी की दुकानों पर उधार का खाता खोलना पड़ रहा है।
स्पर्श पोर्टल की पेचीदगी में उलझे करोड़ों रुपये
हरियाणा में मिड-डे मील योजना के तहत राशन और दैनिक रसद पर हर माह लगभग ₹10 करोड़ खर्च होते हैं। दाल, आटा, तेल, मसाले और सोया चूरा जैसी सूखी सामग्री हरियाणा एग्रो उपलब्ध कराता है, लेकिन हरी सब्जियां, दूध, दही, गुड़ और सबसे अहम—रसोई गैस सिलिंडर—का इंतजाम स्कूलों को खुद नकद या स्थानीय स्तर पर करना पड़ता है।
इस पूरे संकट की जड़ नई भुगतान प्रणाली ‘स्पर्श पोर्टल’ बताई जा रही है। नई व्यवस्था के तहत: पूरे प्रदेश के बिल अब सीधे पंचकूला स्थित सिंगल साइबर ट्रेजरी में जमा होते हैं। वहां से कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइल केंद्रीय टीम के पास सत्यापन (वेरिफिकेशन) के लिए भेजी जाती है। इसी दोहरी प्रशासनिक प्रक्रिया और तकनीकी अड़चनों के चलते पिछले 6 माह से बजट का पहिया थमा हुआ है।
जमीनी हकीकत: कहीं जेब से खर्च, कहीं उधारी पर जल रहा चूल्हा
बजट की कमी से जमीनी स्तर पर स्कूल प्रभारियों के सामने रोज़ाना खाना पकाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है: राजकीय प्राथमिक पाठशाला, काबुलपुर के इंचार्ज प्रदीप कुमार बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई और खुराक न छूटे, इसलिए वे महीनों से अपनी जेब से पैसे लगाकर चूल्हा जलवा रहे हैं। जीपीएस भानूपुरा (कैथल) के इंचार्ज बलवान और रायपुर स्कूल के हेड टीचर कुलवंत सिंह का कहना है कि गैस सिलिंडर, दूध-दही और परचून का सामान अब सिर्फ उधारी के भरोसे आ रहा है। दुकानदारों का तकादा बढ़ता जा रहा है, जिससे स्कूल चलाना सिरदर्द बन चुका है।
वहीं स्कूलों में खाना पकाने वाली रसोइया (कुक-कम-हेल्पर) भी परेशान हैं। उन्हें मिलने वाले ₹7,000 मासिक मानदेय में से ₹6,000 राज्य और ₹1,000 केंद्र सरकार देती है, जिस पर इस गतिरोध का असर पड़ रहा है।
विभाग का दावा: एक हफ्ते में खाते में पहुंचेगा पैसा
बढ़ते दबाव के बीच शिक्षा विभाग ने जल्द समाधान का दावा किया है। मिड-डे मील (हरियाणा) के जनरल मैनेजर वरिंदर गोदारा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:
“स्पर्श पोर्टल लागू होने के कारण अप्रैल से केंद्र का हिस्सा लंबित चल रहा था। पंचकूला साइबर ट्रेजरी में बिल सबमिट हो चुके हैं और अब यह अंतिम सत्यापन के लिए केंद्रीय टीम के पास हैं। पूरी उम्मीद है कि अगले एक सप्ताह के भीतर करीब 70 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी हो जाएगी। शिक्षकों को घबराने की जरूरत नहीं है, जिन वेंडरों से सामान उधार लिया गया है, उनके खातों में सीधे भुगतान ट्रांसफर कर दिया जाएगा।”
इन-शॉर्ट फैक्ट फाइल
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
| प्रभावित स्कूल | ~12,000 (प्राथमिक एवं माध्यमिक) |
| कुल बकाया राशि | करीब ₹70 करोड़ (अप्रैल से सितंबर) |
| मासिक जरूरत | ₹10 करोड़ प्रति माह |
| अटकने की वजह | स्पर्श पोर्टल व केंद्रीय सत्यापन प्रक्रिया |
| स्कूलों का संकट | गैस सिलिंडर, दूध, दही और सब्जी की उधारी |


