भारतीय रिजर्व बैंक की देखरेख में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा अप्रैल 2016 में लॉन्च किया गया यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई आज भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम की सबसे मजबूत कड़ी बन चुका है। अपने संचालन के एक दशक के भीतर यूपीआई ने असाधारण विस्तार करते हुए लेन-देन की मात्रा में लगभग 12,000 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो वित्त वर्ष 2016-17 में जहाँ केवल 2 करोड़ लेन-देन हुए थे वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई है। इसी तरह लेन-देन की वैल्यू के मामले में भी 4,000 गुना से अधिक का उछाल देखा गया है जो वित्त वर्ष 2016-17 के ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग ₹314 लाख करोड़ के स्तर पर पहुँच गई है।
यूपीआई की इस अभूतपूर्व सफलता और विश्वसनीयता को वैश्विक स्तर पर भी मान्यता मिली है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इसे लेन-देन की मात्रा के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली के रूप में स्वीकार किया है। वर्तमान में वैश्विक रियल-टाइम भुगतानों का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा अकेले यूपीआई के माध्यम से होता है। प्रति दिन औसतन 66 करोड़ से अधिक लेन-देन को सफलतापूर्वक प्रोसेस करके भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपना नेतृत्व साबित किया है।
संस्थागत भागीदारी के मामले में भी यूपीआई ने लंबा सफर तय किया है। शुरुआत में केवल 21 बैंकों के साथ शुरू हुआ यह मंच आज 703 से अधिक बैंकों को अपने साथ जोड़ चुका है जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ सहकारी और लघु वित्त बैंक भी शामिल हैं। यूपीआई की स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मार्च 2026 में इसने 2264 करोड़ लेन-देन की रिकॉर्ड मासिक मात्रा और ₹29.53 लाख करोड़ की रिकॉर्ड मासिक वैल्यू का स्तर छुआ है।
भुगतान के व्यवहार का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि यूपीआई का इस्तेमाल छोटे खुदरा भुगतानों के लिए सबसे अधिक किया जा रहा है। कुल लेन-देन की मात्रा में मर्चेंट पेमेंट्स की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है जिसमें से 86 प्रतिशत लेन-देन ₹500 से कम राशि के होते हैं जो दैनिक वाणिज्य में इसकी गहरी पैठ को दर्शाते हैं। दूसरी ओर व्यक्तियों के बीच होने वाले धन हस्तांतरण यानी पी2पी लेन-देन कुल वैल्यू में 71 प्रतिशत का योगदान देते हैं जिसका अर्थ है कि उच्च मूल्य के लेनदेन के लिए भी लोग यूपीआई पर पूरा भरोसा करते हैं।
घरेलू स्तर पर क्रांति लाने के बाद अब यूपीआई एक वैश्विक मानक की तरह उभर रहा है। वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात सिंगापुर फ्रांस भूटान नेपाल श्रीलंका और मॉरीशस जैसे 8 देशों में यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार किया जा रहा है जबकि कतर में इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया जारी है। सिंगापुर के पेनाउ जैसे अंतरराष्ट्रीय सिस्टम के साथ जुड़ने से सीमा पार हस्तांतरण की प्रक्रिया भी सुगम हुई है। भारत सरकार अब यूपीआई के अगले दशक में नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ने और निरंतर तकनीकी विकास के माध्यम से वित्तीय समावेशन को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रही है ।

