नई दिल्ली:
मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान इतिहास के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे एक बेहद असामान्य और शक्तिशाली अल नीनो का खतरा गहरा गया है। अमेरिकी एजेंसी ‘नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) के अनुसार, 22 अक्तूबर को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान रिकॉर्ड 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की चेतावनी के मुताबिक, यह मौसमी घटना दिसंबर तक अपने चरम पर पहुंचेगी, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में चरम मौसम (Extreme Weather) का संकट खड़ा हो सकता है।
क्यों चिंता का विषय है समुद्र का उबलना?
अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी चक्र है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। यह गर्मी वायुमंडलीय परिसंचरण (हवाओं के रुख और बादलों के बनने की प्रक्रिया) को पूरी तरह उलट-पुलट कर देती है।
WMO के ताजा आंकड़ों के मुताबिक:
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नीनो 3.4 क्षेत्र में जून के दौरान समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 1.6°C अधिक था।
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अगस्त तक यह अंतर बढ़कर 2.5°C हो गया।
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अनुमान है कि अक्तूबर से दिसंबर के बीच तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है, जो अब तक का ऐतिहासिक स्तर है।
भारत पर सीधा असर: मानसून, खेती और जल संकट
भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए गंभीर है क्योंकि देश की कृषि और जल सुरक्षा सीधे तौर पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। अल नीनो मानसूनी पवनों को कमजोर करने के लिए जाना जाता है:
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कमजोर बारिश का असर: भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की कुल बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।
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सर्दियों में अधिक गर्मी: WMO के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले महीनों में दक्षिण एशिया के बड़े हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका है। यानी इस बार सर्दियों की तीव्रता कम रह सकती है।
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कम बारिश की मार: अक्तूबर से दिसंबर के दौरान भारत के मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में बारिश की मात्रा सामान्य से कम रहने के संकेत हैं, जिससे रबी की फसलों और जलाशयों के जलस्तर पर सीधा असर पड़ सकता है।
क्या सिर्फ अल नीनो ही है जिम्मेदार?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का मौसम केवल अल नीनो से ही तय नहीं होता। हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole – IOD) और स्थानीय मौसमी दशाएं भी इसमें भूमिका निभाती हैं। हालांकि, प्रशांत महासागर में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण इस बार अल नीनो इतना शक्तिशाली है कि यह अन्य सभी स्थानीय अनुकूल कारकों को दबा सकता है, जिससे भारत में असामान्य गर्मी, सूखे की स्थिति और फसल चक्र के प्रभावित होने का जोखिम बढ़ गया है।


