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कुसमी
प्रशासनिक व्यस्तताओं और फाइलों के अंबार से दूर जब कोई शीर्ष अधिकारी वनांचल के किसी छोटे से स्कूल में बच्चों के बीच बैठता है, तो वह दृश्य न सिर्फ आत्मीय बन जाता है बल्कि बच्चों के भविष्य को नई उड़ान दे जाता है। कुछ ऐसा ही आत्मीय और प्रेरणादायक नजारा विकासखंड कुसमी के सुदूर वनांचल में स्थित प्राथमिक शाला फुतूरटोली में देखने को मिला। यहाँ औचक निरीक्षण पर पहुंचीं कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी अचानक एक संवेदनशील शिक्षिका की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने बच्चों के बीच पहुंचकर न सिर्फ उनके दिल में जगह बनाई, बल्कि ब्लैकबोर्ड के सामने खड़े होकर उनकी पढ़ाई के स्तर को भी परखा।
दूरस्थ क्षेत्र के इस स्कूल में बच्चों से सीधा संवाद करते हुए जब कलेक्टर ने अंग्रेजी और गणित के सवाल पूछे, तो वनांचल के नन्हे-मुन्नों के चेहरों पर झिझक की जगह एक अनोखा आत्मविश्वास तैर उठा।
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जब ब्लैकबोर्ड पर गुंजन ने की गुणा और टार्जन ने सुनाया पहाड़ा
निरीक्षण के दौरान स्कूल की शिक्षिका ने बताया कि पहली से पांचवीं तक संचालित इस प्राथमिक शाला में कुल 13 विद्यार्थी नामांकित हैं, जिनमें से आज 9 बच्चे उपस्थित हैं। बच्चों की हाजिरी कम देखकर कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए निर्देश दिए कि अनुपस्थित बच्चों के पालकों से सीधे संपर्क किया जाए और हर बच्चे की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इसके बाद कलेक्टर ने बच्चों के ज्ञान को परखने के लिए हाथ में चौक उठाई और ब्लैकबोर्ड पर गणित के सवाल लिखे।
कक्षा चौथी की नन्हीं छात्रा गुंजन केरकेट्टा ने बिना किसी डर के ब्लैकबोर्ड पर जाकर गुणा (मल्टीप्लिकेशन) के कठिन सवालों को चुटकियों में हल कर दिया और मुस्कुराते हुए 12 तक का पहाड़ा सुनाया। गुंजन के इस हौसले के तुरंत बाद पांचवीं कक्षा के छात्र टार्जन किंडो ने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़े होकर पहाड़ा सुनाया। वनांचल के इन बच्चों के भीतर छिपी इस प्रतिभा और बेबाकी को देखकर कलेक्टर भावविभोर हो उठीं और उन्होंने बच्चों की जमकर सराहना की।
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अंग्रेजी के सही उच्चारण का कराया अभ्यास, सुधारीं गलतियाँ
गणित के बाद बारी अंग्रेजी की थी। कलेक्टर ने बच्चों से रोजमर्रा की जिंदगी और जंगलों से जुड़े विभिन्न जानवरों के नाम अंग्रेजी में पूछे। बच्चों ने भी बिना किसी हिचकिचाहट के एक के बाद एक जवाब दिए। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने बच्चों को अंग्रेजी शब्दों के सही और स्पष्ट उच्चारण (प्रोनॉन्सिएशन) का अभ्यास कराया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि शब्दों को सही तरीके से बोलने का यदि नियमित अभ्यास किया जाए, तो किसी भी भाषा पर बहुत मजबूत पकड़ बनाई जा सकती है।
उन्होंने बच्चों से खुद कई जानवरों के नाम अंग्रेजी में बुलवाए और जहाँ बच्चे अटक रहे थे, वहाँ बड़े प्यार से उनके उच्चारण में सुधार कराया। कलेक्टर मैम को अपने बीच एक शिक्षिका के रूप में पाकर बच्चों का उत्साह सातवें आसमान पर था और उन्होंने पूरे आनंद के साथ इस विशेष क्लास में हिस्सा लिया।
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हर बच्चे की सीखने की गति अलग, कमजोर बच्चों को दें अतिरिक्त समय
बच्चों के भीतर सीखने की इस ललक को देखकर कलेक्टर ने स्कूल के शिक्षकों की क्लास ली और उन्हें शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बेहद मर्मस्पर्शी और व्यावहारिक निर्देश दिए। उन्होंने कहा:
“हर बच्चे की मानसिक क्षमता और सीखने की गति (लर्निंग स्पीड) अलग होती है। कोई बच्चा जल्दी सीखता है तो किसी को थोड़ा वक्त लगता है। इसलिए शिक्षकों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे कक्षा में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान करें, उन्हें हीन भावना से बचाएं और उन्हें अतिरिक्त समय देकर विशेष मार्गदर्शन प्रदान करें।”
उन्होंने शिक्षकों से बेहद गंभीर लहजे में कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति, स्कूल में मिलने वाला गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और उनका सतत अभ्यास ही उनकी मजबूत शैक्षणिक नींव तैयार कर सकता है। जब तक वनांचल के इन बच्चों की नींव मजबूत नहीं होगी, तब तक उनके बेहतर भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। कलेक्टर के इस आत्मीय निरीक्षण और संवेदनशीलता ने फुतूरटोली स्कूल के बच्चों और शिक्षकों के मन में शिक्षा के प्रति एक नया संकल्प फूंक दिया है।

