सावधान! अगर आपके फोन में भी बजा है ये सायरन, तो घबराएं नहीं… इसके पीछे छिपी है एक बड़ी वजह
वर्ष 2026 में दक्षिण एशिया और विशेषकर भारत के लिए मानसून काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के हालिया अनुमान बताते हैं कि इस साल जून से सितंबर के दौरान मानसूनी बारिश औसत से कम रहने की आशंका है। इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण अल नीनो का प्रभाव माना जा रहा है, जिससे प्रशांत महासागर की गर्मी वैश्विक मौसम चक्र को प्रभावित कर रही है। हालांकि उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में ठीक-ठाक बारिश हो सकती है, लेकिन मध्य भारत के कृषि क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति पैदा होने का डर है।
मजदूरी भुगतान में आएगी तेजी: छत्तीसगढ़ मनरेगा को मिले 1333 करोड़, 212 करोड़ का भुगतान
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस बार मौसम का मिजाज बेहद असंतुलित रहेगा। एक तरफ जहाँ लंबे समय तक बारिश न होने से सूखा पड़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ अचानक होने वाली अतिवृष्टि से बाढ़ का खतरा भी बना रहेगा। इसके साथ ही गर्मी का प्रकोप भी कम नहीं होगा। दिन और रात दोनों के तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है, जिसका मतलब है कि रातें भी गर्म होंगी। यह बढ़ती गर्मी न केवल खेती और जल संसाधनों पर दबाव डालेगी, बल्कि लू के कारण स्वास्थ्य समस्याओं और बिजली की मांग में भी भारी इजाफा कर सकती है। फिलहाल वैज्ञानिक स्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन मानसून की यह अनिश्चितता किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।

