मजदूरी भुगतान में आएगी तेजी: छत्तीसगढ़ मनरेगा को मिले 1333 करोड़, 212 करोड़ का भुगतान
**हथबंद:** रिंगनी रेलवे फाटक के पास बीते कल शाम एक ऐसी वारदात हुई जिसने फिल्मी थ्रिलर की याद दिला दी, लेकिन हथबंद पुलिस और साइबर सेल की जांबाजी ने इस ‘क्राइम थ्रिलर’ का अंत सलाखों के पीछे कर दिया।
वारदात 1 मई की शाम करीब पौने छह बजे की है, जब आर.एस. इंफ्रा कंपनी के सुपरवाइजर शैनू शेख रिंगनी रेलवे फाटक के पास मौजूद थे। तभी अचानक एक तेज रफ्तार सफेद स्कॉर्पियो (CG16 CU 2066) वहां आकर रुकी और उसमें से उतरे चार बदमाशों ने शैनू पर हमला बोल दिया। सरेराह मारपीट करने के बाद आरोपी फिल्मी अंदाज में सुपरवाइजर को जबरन गाड़ी में ठूंसकर धूल उड़ाते हुए मौके से फरार हो गए।
इस सनसनीखेज अपहरण की खबर जैसे ही पुलिस तक पहुंची, पूरे महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत नाकेबंदी के आदेश जारी कर दिए।
पुलिस और बदमाशों के बीच शुरू हुआ यह ‘चेस गेम’ करीब 12 घंटों तक चला। हथबंद पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज और टोल नाकों के सुरागों का पीछा करते हुए अपनी दिशा तय की। किडनैपर्स पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन टीम उनके साये की तरह पीछे लगी रही। पीछा करते-करते छत्तीसगढ़ पुलिस की यह टीम पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले तक जा पहुंची। करंजिया के पास घेराबंदी कर पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया और मौत के साये में जी रहे शैनू शेख को सकुशल उनके चंगुल से आजाद करा लिया।

पकड़े गए आरोपियों में ओम नारायण पांडेय, अजय यादव, अभिषेक श्याम और योगीराज परस्ते शामिल हैं, जो मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि इस पूरे किडनैपिंग ड्रामा के पीछे कोई और नहीं बल्कि पुरानी रंजिश और आपसी विवाद की आग सुलझ रही थी। रंजिश का बदला लेने के लिए आरोपियों ने फिल्मी तर्ज पर इस वारदात की पटकथा लिखी थी, लेकिन पुलिस की तत्परता ने उनकी पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दिया। फिलहाल, पुलिस ने स्कॉर्पियो सहित चारों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और आज उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।

