नई दिल्ली (धर्म डेस्क): सनातन धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध महालय) का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। यह 16 दिनों की पवित्र अवधि पूर्ण रूप से पितरों (पूर्वजों) के स्मरण, तर्पण और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में पूर्वज सूक्ष्म रूप में मृत्युलोक पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए जल और अन्न को ग्रहण कर उन्हें सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत की तारीख को लेकर बना संशय समाप्त हो गया है। साल 2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा।
26 सितंबर से शुरुआत, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पंचांग गणना के अनुसार, भाद्रपद मास की पूर्णिमा से पितृ पक्ष का आरंभ माना जाता है और आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से नियमित तिथिवार श्राद्ध शुरू होते हैं:
-
शुरुआत की सही तारीख: वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार को भाद्रपद पूर्णिमा के श्राद्ध के साथ होगी।
-
समापन: इसका समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के दिन होगा। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध इसी दिन करने का विधान है।
पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज का विशेष महत्व
शास्त्रों में पितृ पक्ष को श्रद्धा और आत्मसंयम का काल कहा गया है। इन 16 दिनों में पितृदोष से मुक्ति पाने और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए मुख्य रूप से चार कार्य किए जाते हैं:
-
तर्पण: प्रातः काल स्नान के बाद कुश और काले तिल मिश्रित जल से पितरों को अंजलि दी जाती है।
-
पिंडदान: जौ के आटे, तिल और दूध से बने पिंड अर्पित कर पिंडदान कर्म संपन्न किया जाता है।
-
पंचबलि व ब्राह्मण भोज: भोजन तैयार होने पर सबसे पहले गाय, कुत्ते, कौवे, देवता और चींटियों के लिए ग्रास निकाला जाता है। इसके बाद सात्विक भाव से ब्राह्मणों को भोजन कराकर सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा दी जाती है।
पितृ पक्ष 2026: तिथिवार संपूर्ण श्राद्ध कैलेंडर























