साइबर ठगी के शिकार होने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या पैसा वापस पाने की लंबी कानूनी प्रक्रिया रही है इस चुनौती को देखते हुए गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल शुरू किया है
यह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का एक नया डिजिटल मॉड्यूल है जिसका मुख्य उद्देश्य पीड़ित को ठगी गई रकम वापस दिलाना है यह उन मामलों में काम आता है जहां ठगी गई राशि अपराधी के बैंक खाते में फ्रीज हो चुकी है
रिफंड पाने के लिए दो शर्तें जरूरी हैं पहली यह कि पीड़ित ने ठगी के तुरंत बाद 1930 हेल्पलाइन पर कॉल किया हो या पोर्टल पर शिकायत दर्ज की हो दूसरी शर्त यह है कि पैसा अपराधी के बैंक खाते में ट्रेस होकर फ्रीज हो गया हो यदि पैसा दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गया है तो रिफंड संभव नहीं होगा
रिफंड की प्रक्रिया तीन श्रेणियों में है 50 हजार रुपये तक की राशि के लिए एफआईआर और कोर्ट ऑर्डर की जरूरत नहीं है 50 हजार रुपये से अधिक लेकिन कई खातों में बंटी राशि के लिए भी यह जरूरी नहीं है जबकि एक ही खाते में 50 हजार रुपये से अधिक राशि होने पर एफआईआर और कोर्ट ऑर्डर अनिवार्य है
आवेदन करने के लिए पोर्टल पर सिटिजेन लॉगिन करें रेज रिफंड रिक्वेस्ट सेक्शन में अपनी 14 अंकों वाली कंप्लेंट आईडी दर्ज करें और जरूरी दस्तावेज जैसे पैन कार्ड व बैंक अकाउंट डिटेल्स अपलोड करें सबमिशन के बाद मिलने वाले ट्रैकिंग कोड से आप स्टेटस चेक कर सकते हैं
साइबर अपराध की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा के लिए बजट बढ़ाया है इसके अलावा दूरसंचार विभाग का संचार साथी पोर्टल भी संदिग्ध सिम कार्ड और आईएमईआई नंबर ब्लॉक करने का काम कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके

