केंद्रीय गृह मंत्रालय देश के करीब 30 लाख पुलिसकर्मियों, अर्धसैनिक बलों और आपदा राहत कर्मियों के लिए एक खास और सुरक्षित देशव्यापी ब्रॉडबैंड नेटवर्क तैयार करने जा रहा है। ब्रॉडबैंड पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ यानी BB-PPDR नाम के इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद गंभीर और आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षा बलों को तेज आवाज, वीडियो और डेटा साझा करने की आधुनिक सुविधा देना है।
इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, एनडीआरएफ, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं को शामिल किया जाएगा। नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुल 30 लाख उपकरणों की जरूरत होगी, जिन्हें तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें कठिन परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाले 21 लाख फील्ड हैंडसेट, वरिष्ठ अधिकारियों के लिए 6 लाख स्मार्टफोन और 3 लाख वाहन या स्थिर उपकरण शामिल होंगे। इसके अलावा सुरक्षा बलों को निर्देश देने और तुरंत संवाद के लिए मिशन क्रिटिकल पुश-टू-टॉक, डेटा और वीडियो जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
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गृह मंत्रालय ने इस तकनीक के लिए 814-824 मेगाहर्ट्ज और 859-869 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम का सैद्धांतिक आवंटन प्राप्त कर लिया है, जो आम मोबाइल ब्रॉडबैंड से अलग है। नेटवर्क की उपयोगिता और डिजाइन को परखने के लिए अंडमान-निकोबार, अमृतसर, बस्तर, बंगलूरू, गुवाहाटी, लद्दाख, लक्षद्वीप, मुंबई, रुद्रप्रयाग और विशाखापत्तनम समेत कुल 10 जगहों पर शुरुआती परीक्षण किए जाएंगे। फिलहाल मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट के तकनीकी ढांचे और डिजाइन को लेकर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं ताकि देश की सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से सबसे बेहतरीन नेटवर्क तैयार किया जा सके।
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