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रायपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने संविदा कर्मचारियों के मातृत्व लाभ से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में बड़ा और दूरगामी निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संविदा पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को भी 180 दिन का मातृत्व अवकाश पाने का पूरा कानूनी अधिकार है, भले ही उनकी संविदा की अवधि या सेवाकाल समाप्त हो रहा हो।
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मुख्य न्यायाधीश कृष्णा राम महापात्र और न्यायाधीश संतोष शर्मा की युगल पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए याचिका खारिज करने संबंधी एकल पीठ के पूर्व आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता महिला डॉक्टर को 180 दिन का सवेतन मातृत्व अवकाश प्रदान करने और उनके खिलाफ जारी बर्खास्तगी आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला कोरबा स्थित बिसाहूदास महंत मेमोरियल सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है। यहां प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में संविदा सहायक प्रोफेसर के पद पर डॉ. निकिता श्रीवास्तव की नियुक्ति 16 नवंबर, 2022 को की गई थी। सेवा के दौरान गर्भवती होने पर उन्होंने मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के प्रावधानों के तहत 31 जुलाई, 2026 को आवेदन प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने 1 अगस्त, 2026 से 28 जनवरी, 2027 तक कुल 180 दिनों के सवेतन मातृत्व अवकाश की मांग की थी। विभाग के विभागाध्यक्ष ने 3 अगस्त, 2026 को यह आवेदन स्वीकृति हेतु कॉलेज के डीन के पास भेज दिया था।
कॉलेज प्रशासन का तर्क और बर्खास्तगी नोटिस
कॉलेज प्रशासन ने अवकाश स्वीकृत करने के बजाय 6 अगस्त, 2026 को महिला डॉक्टर को एक महीने का बर्खास्तगी नोटिस थमा दिया। प्रशासन ने तर्क दिया कि इस पद पर नियमित चिकित्सक डॉ. शीला वर्मा की नियुक्ति 25 जून, 2026 को हो चुकी है, इसलिए संविदा सेवा स्वतः समाप्त मानी जाएगी और उन्हें अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता।
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एकल पीठ से लेकर खंडपीठ तक की कानूनी लड़ाई
कॉलेज प्रशासन के इस रवैये के खिलाफ डॉ. निकिता श्रीवास्तव ने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर की थी, जिसे 8 सितंबर को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने युगल पीठ के समक्ष अपील की।
अपील की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले—‘डॉ. कविता यादव विरुद्ध सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय’ का हवाला दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में स्पष्ट किया था कि संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी मातृत्व लाभ की निर्धारित अवधि प्रभावी रह सकती है।
अदालत की बड़ी टिप्पणियां और निर्देश
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने पाया कि नियमित डॉक्टर के कार्यभार संभालने के बाद भी कॉलेज प्रशासन ने याचिकाकर्ता से निरंतर सेवाएं ली थीं और जब उन्होंने 31 जुलाई को आवेदन किया, तब वह सक्रिय रूप से सेवा में थीं।
अदालत ने एकल पीठ के फैसले और मेडिकल कॉलेज के बर्खास्तगी नोटिस को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया। न्यायालय ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को उनके आवेदन की तिथि से पूरे 180 दिनों का मातृत्व अवकाश और अधिनियम के तहत मिलने वाले सभी वित्तीय व अन्य मातृत्व लाभ अविलंब प्रदान किए जाएं। इस फैसले से छत्तीसगढ़ के संविदा कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मियों को एक मजबूत कानूनी सुरक्षा कवच मिला है।


