नई दिल्ली: देश में पैक्ड फूड और पेय पदार्थों में मौजूद हानिकारक तत्वों को लेकर उपभोक्ताओं की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। ‘लोकल सर्कल्स’ के एक ताजा राष्ट्रीय सर्वे के अनुसार, 10 में से 8 यानी 80 फीसदी लोगों का मानना है कि यदि किसी उत्पाद में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट में से कोई एक भी तत्व तय सीमा से अधिक है, तो फूड रेगुलेटर FSSAI को पहले ही दिन से उस पर चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य करना चाहिए।
यह सर्वे भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सौंपे गए उस प्रस्ताव के बाद सामने आया है, जिसमें शुरुआत में केवल दो या उससे अधिक हानिकारक तत्वों की अधिकता वाले उत्पादों पर ही फ्रंट-ऑफ-पैकेट वॉर्निंग लेबल लगाने की योजना बनाई गई है। सर्वे के मुताबिक, केवल 12 फीसदी लोग ही FSSAI के इस दो-चरणीय (Phased) फॉर्मूले के पक्ष में हैं।
लोगों की दलील है कि बाजार में मिलने वाले बिस्किट, चिप्स, नमकीन और मीठे पेय पदार्थों में अक्सर कोई एक तत्व—जैसे केवल अत्यधिक चीनी या केवल अधिक नमक—ही पाया जाता है। ऐसे में अगर ‘दो या उससे अधिक तत्वों’ की शर्त रखी गई, तो बड़ी संख्या में अस्वास्थ्यकर खाद्य उत्पाद बिना किसी चेतावनी लेबल के ही बाजार में बिकते रहेंगे।
सर्वे में उपभोक्ताओं ने पारदर्शिता को लेकर कई अहम मांगे रखी हैं: चेतावनी लेबल केवल औपचारिकता न हो, बल्कि पैकेट के सामने (फ्रंट पैनल पर) बड़े और साफ अक्षरों में दिखे ताकि खरीदारी करते समय तुरंत नजर पड़े। पैकेट पर उत्पाद में मौजूद कुल चीनी, नमक और फैट की पूरी व स्पष्ट जानकारी दर्ज होनी चाहिए।अधिकांश लोगों ने नियामक द्वारा नियमों को किस्तों में लागू करने के बजाय सख्त मानकों के साथ सीधे लागू करने की जरूरत बताई है।























