रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना विभागीय उदासीनता की भेंट चढ़ती दिख रही है। 1 अगस्त से विकासखंड स्तर तक के सरकारी दफ्तरों में स्मार्ट मीटरों को प्री-पेड मोड में बदलने के सख्त आदेश जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद विभाग बिजली का अग्रिम भुगतान (प्री-पेमेंट) करने में भारी लापरवाही बरत रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान (ग्रांट) की एक-तिहाई राशि पर रोक लगा दी है।
32,741 कनेक्शन चिह्नित, 85% मीटर लगे लेकिन मिला सिर्फ ₹2 करोड़
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार बिजली कंपनी ने सरकारी दफ्तरों में प्री-पेड व्यवस्था लागू करने के लिए नोडल अधिकारी भी तैनात किए थे:
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85% दफ्तरों में मीटर लगे: प्रदेश में विकासखंड स्तर तक कुल 32,741 सरकारी कनेक्शन चिह्नित किए गए थे, जिनमें से लगभग 85% दफ्तरों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर इंस्टॉल हो चुके हैं।
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नाममात्र का भुगतान: पूरे प्रदेश के हजारों सरकारी दफ्तरों से अब तक प्री-पेमेंट के नाम पर महज 1.5 से 2 करोड़ रुपये ही बिजली कंपनी के खाते में आए हैं।
45 विभागों पर ₹3,000 करोड़ बकाया, बड़े विभाग साधे हैं चुप्पी
राज्य में सरकारी दफ्तरों पर पहले से ही बिजली बिलों का भारी भरकम बकाया है, जो अब केंद्र की योजनाओं में अड़चन बन रहा है:
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₹3,000 करोड़ की देनदारी: वर्तमान में छत्तीसगढ़ के लगभग 45 सरकारी विभागों पर करीब 3,000 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है।
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बड़े विभागों की टालमटोल: सबसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले नगरीय प्रशासन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे बड़े विभाग प्री-पेमेंट और बकाया चुकाने में लगातार आनाकानी कर रहे हैं।
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केवल 6 जिलों ने दिखाई रुचि: अब तक केवल 6 जिलों में आरटीओ, क्रेडा, पशु चिकित्सा विभाग (बलौदाबाजार), जिला पंचायत (बलौदाबाजार, कबीरधाम, दुर्ग) और मानवाधिकार आयोग कार्यालय ने ही प्री-पेमेंट में सक्रियता दिखाई है।
RDSS स्कीम के नियमों में फंसा फंड, 4 किश्तों का प्लान भी फेल
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) बिजली कंपनियों की वित्तीय सेहत सुधारने के लिए शुरू की गई है:
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शून्य बकाए की शर्त: आरडीएसएस के कड़े प्रावधानों के तहत अगली वित्तीय किस्त तभी जारी हो सकती है, जब सभी सरकारी स्मार्ट मीटर पूरी तरह प्री-पेड मोड पर चलें और पुराना बकाया शून्य हो।
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किश्तों का रोडमैप बेअसर: 3,000 करोड़ के बकाए को खत्म करने के लिए चार त्रैमासिक किश्तों (जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर, जनवरी-मार्च 2027 और अप्रैल-जून 2027) की योजना बनाई गई थी। विभागों द्वारा न तो पुराना बिल चुकाया जा रहा है और न ही नया प्री-पेमेंट किया जा रहा है, जिसका सीधा खामियाजा अब राज्य के विकास फंड को भुगतना पड़ रहा है।























