स्कूली छात्र-छात्राओं को बाल वैज्ञानिक के रूप में पहचान दिलाने और उनकी नवाचारी सोच को पंख देने के लिए केंद्र सरकार की ‘इंस्पायर-अवार्ड मानक’ (INSPIRE-MANAK) योजना में नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों और विद्यालयों को राहत देते हुए ऑनलाइन नामांकन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 10 अक्टूबर 2026 कर दिया है। हालांकि, तिथि विस्तार के बावजूद कई विद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया को लेकर सुस्ती देखी जा रही है, जिस पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
चयनित मॉडल पर मिलेंगे सीधे ₹10,000 की प्रोत्साहन राशि
ग्रामीण और शहरी अंचलों में छिपी वैज्ञानिक प्रतिभाओं को तराशने के लिए भारत सरकार की यह अनूठी पहल है: योजना के तहत चुने गए प्रत्येक विद्यार्थी के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से ₹10,000 की सहायता राशि सीधे भेजी जाएगी, जिससे छात्र अपने नवाचारी विचार का व्यावहारिक मॉडल/प्रोटोटाइप बना सकें। छात्र-छात्राओं को अपने अनूठे आइडिया पर आधारित न्यूनतम 150 शब्दों का सार (Synopsis) और प्रोजेक्ट मॉडल की 1 पेज पर बनी ड्राइंग/इमेज पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। जिला शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिलों के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों की भागीदारी तय की जाए: कक्षा 6वीं से 12वीं तक संचालित प्रत्येक स्कूल को अपने यहां से कम से कम 5 उत्कृष्ट और मौलिक नवाचारों का नामांकन अनिवार्य रूप से कराना होगा।
सख्त दिशा-निर्देशों के बावजूद कई स्कूल अब भी नामांकन कराने में हीलाहवाली कर रहे हैं और ज्यादातर संस्थानों ने प्रक्रिया शुरू तक नहीं की है। संयुक्त शिक्षा निदेशक और जिला शिक्षा अधिकारियों ने सभी संस्था प्रमुखों को चेतावनी दी है कि 10 अक्टूबर की बढ़ाई गई अंतिम तिथि से पहले हर हाल में लक्ष्य पूरा किया जाए, ताकि सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों का कोई भी होनहार बाल वैज्ञानिक इस राष्ट्रीय अवसर से वंचित न रह जाए।























