नई दिल्ली:
देश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में बुधवार को ऐतिहासिक फैसला हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की कुल 60.72 प्रतिशत रणनीतिक हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
कनाडाई वित्तीय समूह ‘फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स’ (Fairfax Financial Holdings) की अनुषंगी कंपनी ‘M/s 10955230 कनाडा इंक’ इस बैंक की रणनीतिक खरीदार होगी। कुल ₹52,878.08 करोड़ का यह मेगा सौदा भारतीय वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) साबित होने जा रहा है।
रणनीतिक विनिवेश के तहत दोनों प्रमुख शेयरधारकों की हिस्सेदारी का बंटवारा इस प्रकार रहेगा:
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किसकी कितनी हिस्सेदारी बिकेगी: केंद्र सरकार अपनी कुल 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स को हस्तांतरित करेगी (कुल 60.72%)।
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सरकार व एलआईसी के पास शेष हिस्सेदारी: इस सौदे के बाद भी बैंक में घरेलू हिस्सेदारी पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रहेगी, यानी दोनों के पास संयुक्त रूप से 34 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी।
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ओपन मार्केट से शेष शेयर बिक्री की छूट: भविष्य में सरकार की शेष बची 15 प्रतिशत हिस्सेदारी को खुले बाजार के जरिए बेचने का अधिकार अधिकृत मंत्री समूह (अल्टरनेटिव मैकेनिज्म) को सौंपा गया है। वहीं एलआईसी अपनी 19 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रबंधन आंतरिक व विनियामक दिशानिर्देशों के तहत करेगी।
पारदर्शी बोली और शेयर मूल्यांकन: ₹81 प्रति शेयर की दर पर मुहर
रणनीतिक बिक्री की पूरी प्रक्रिया अंतर-मंत्रालयी समूह (IMG) और विनिवेश सचिवों के मुख्य समूह (CGD) की देखरेख में दो-स्तरीय पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रणाली के माध्यम से पूरी की गई:
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‘फिट एंड प्रॉपर’ व सुरक्षा क्लीयरेंस: बोलीदाताओं के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से ‘फिट एंड प्रॉपर’ सत्यापन और केंद्रीय गृह मंत्रालय से सुरक्षा क्लीयरेंस अनिवार्य रखा गया था।
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स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों का आकलन: दो स्वतंत्र पेशेवर एजेंसियों ने बैंक के शेयरों का औसत निष्पक्ष मूल्यांकन ₹75.99 प्रति शेयर किया था।
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सफल बोली: फेयरफैक्स ने प्रति शेयर ₹81 की बोली लगाई, जो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा आकलित मूल्य से अधिक थी। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2025-26 में शुरुआती बोलियों को ₹94.42 प्रति शेयर के रिजर्व प्राइस से कम होने के कारण खारिज कर दिया गया था।
घाटे और पाबंदियों से मुनाफे तक: IDBI बैंक का ऐतिहासिक टर्नअराउंड
वर्ष 1964 में विकास वित्तीय संस्थान (DFI) के रूप में स्थापित और 2004 में वाणिज्यिक बैंक में तब्दील हुए आईडीबीआई बैंक का वित्तीय कायाकल्प भारतीय बैंकिंग इतिहास में मिसाल बना:
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25,000 करोड़ का बेलआउट पैकेज: वर्ष 2010 से 2020 के संकटपूर्ण दौर में सरकार ने बैंक को डूबने से बचाने के लिए लगभग ₹25,000 करोड़ की पूंजी डाली थी।
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PCA फ्रेमवर्क से बाहर: बढ़ते एनपीए (NPA) और घाटे के कारण मई 2017 में आरबीआई ने बैंक पर ‘प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन’ (PCA) पाबंदियां लगाई थीं, जिसे कड़े वित्तीय सुधारों के बाद मार्च 2021 में हटा लिया गया था।
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एनपीए में ऐतिहासिक गिरावट: बैंक का ग्रॉस एनपीए जो सितंबर 2018 में 31.78 प्रतिशत के चिंताजनक स्तर पर था, वह मार्च 2026 में घटकर महज 2.32 प्रतिशत रह गया। वहीं नेट एनपीए 17.30 प्रतिशत से लुढ़ककर मात्र 0.15 प्रतिशत पर आ गया।
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मजबूत वित्तीय स्थिति: वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने ₹9,513 करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। 30 सितंबर 2026 तक बैंक का कुल कारोबार 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ ₹6,27,149 करोड़ पहुंच गया।
आरबीआई की मंजूरी और आगे का रास्ता
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि यह ऐतिहासिक विनिवेश भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में वैश्विक निवेशकों के मजबूत होते भरोसे का प्रमाण है।
सौदे को अंतिम रूप देने के लिए अब सफल बोलीदाता फेयरफैक्स को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के समक्ष अपनी साख और योग्यता साबित करनी होगी तथा केंद्रीय बैंक की विनियामक शर्तों व स्वामित्व नियमों के पालन का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करना होगा।
एक समय भारी वित्तीय संकट से जूझने वाले बैंक का अब क्लीन बैलेंस शीट के साथ निजी क्षेत्र में जाना न केवल बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धी कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देगा, बल्कि देश के बुनियादी वित्तीय सुधारों की दिशा में भी बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।


