नई दिल्ली: देशभर में गुरुवार की सुबह त्याग और समर्पण के प्रतीक त्योहार ‘ईद-उल-अजहा’ (बकरीद) के मौके पर भारी उत्साह और अकीदत का मंजर देखने को मिला। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, देश की तमाम ऐतिहासिक मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह से ही नमाज़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों-लाखों अकीदतमंदों ने एक साथ सफों (कतारों) में खड़े होकर अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाया और ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज अदा की।
सुबह की ठंडी हवाओं और खुशनुमा माहौल के बीच जैसे ही मस्जिदों से तकबीर की आवाजें गूंजीं, बड़ों से लेकर बच्चों तक, सभी पारंपरिक पोशाकों में सज-धजकर नमाज स्थलों की ओर बढ़ते दिखाई दिए।
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देश की तरक्की, शांति और भाईचारे के लिए उठे हाथ
इस मुकद्दस मौके पर अल्लाह की इबादत के साथ-साथ मुल्क के लिए भी खास दुआएं मांगी गईं। नमाज के बाद उलेमाओं और इमामों ने खुतबा (धार्मिक उपदेश) पढ़ा, जिसमें हजरत इब्राहिम की कुर्बानी के ऐतिहासिक महत्व को समझाया गया। इसके बाद जब सामूहिक दुआ के लिए हाथ उठे, तो हर आंख नम थी और हर दिल में देश के लिए मोहब्बत। मुस्लिम भाइयों ने देश की तरक्की, आपसी भाईचारे, खुशहाली और अमन-चैन के लिए विशेष रूप से दुआ मांगी। हर जगह से धार्मिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और कौमी एकता का एक बेहद खूबसूरत संदेश देखने को मिला।
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सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम, चाक-चौबंद रहा प्रशासन
त्योहार को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए देश के सभी राज्यों में स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखा। दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद, मुंबई की हाजी अली दरगाह से लेकर देश के छोटे-बड़े कस्बों के नमाज स्थलों पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी और सीसीटीवी व ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी जा रही थी। प्रशासनिक मुस्तैदी और जनता के सहयोग के चलते देश भर में नमाज की पूरी प्रक्रिया बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुई। कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं मिली।
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गले मिलकर दी बधाई, घरों में शुरू हुआ कुर्बानी का सिलसिला
जैसे ही नमाज मुकम्मल हुई, पूरा माहौल ‘ईद मुबारक’ की गूंज से सराबोर हो गया। नमाजियों ने एक-दूसरे को गले लगाकर और हाथ मिलाकर बकरीद की दिली मुबारकबाद दी। इस दौरान हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने भी एक-दूसरे को गले लगाया, जो भारतीय संस्कृति की साझा विरासत (गंगा-जमुनी तहजीब) की अनूठी मिसाल पेश कर रहा था।
नमाजगाहों से लौटने के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने-अपने घरों में जाकर कुर्बानी की धार्मिक रस्म को पूरा किया। इसके बाद करीबियों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों में तबर्रुक (कुर्बानी का गोश्त) बांटने और दावतों का दौर शुरू हो गया, जो अगले तीन दिनों तक जारी रहेगा। पूरे देश के कोने-कोने में त्योहार का उल्लास, उमंग और रौनक साफ तौर पर देखी जा रही है।

