नई दिल्ली। ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर एक ऐतिहासिक और बड़ा ढांचागत बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार आगामी 1 जुलाई, 2026 से दशकों पुराने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) को पूरी तरह से निरस्त करने जा रही है। इसकी जगह अब नया और आधुनिक कानून ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘VB-G RAM G’ एक्ट लागू किया जाएगा। यह नई योजना न केवल रोजगार के दिन बढ़ाएगी, बल्कि सिस्टम की पुरानी खामियों को दूर कर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और जरूरत-आधारित बनाएगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने हाल ही में संसदीय समिति को जानकारी दी है कि इस नई व्यवस्था के लिए देश के 25 राज्यों ने पहले ही अपनी सहमति देते हुए अपने हिस्से का फंड आवंटित कर दिया है। इस पूरी योजना का कुल अनुमानित वार्षिक बजट 1,51,282 करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसमें से केंद्र सरकार अकेले 95,692.31 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी वहन करेगी। बड़ी बात यह है कि इस योजना को अब ‘केंद्रीय क्षेत्र की योजना’ से बदलकर ‘केंद्र प्रायोजित ढांचे’ (Centrally Sponsored Scheme) में तब्दील कर दिया गया है, ताकि ग्रामीण परिसंपत्ति निर्माण में राज्यों की भी जवाबदेही तय की जा सके।
नई फंडिंग संरचना को राज्यों की वित्तीय क्षमता और भौगोलिक स्थिति के अनुसार डिजाइन किया गया है। सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच लागत का बंटवारा 60:40 के मानक अनुपात में होगा, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है। वहीं बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में इस योजना का 100 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार खुद उठाएगी।
‘VB-G RAM G’ एक्ट ग्रामीण श्रमिकों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई बड़े सुधार लेकर आ रहा है। पुराने 100 दिनों के प्रावधान को खत्म कर, अब हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को एक वित्त वर्ष में न्यूनतम 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही, पुराने मनरेगा जॉब कार्ड्स की जगह अब नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ यानी डिजिटल स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएंगे। भ्रष्टाचार और फर्जी हाजिरी पर लगाम लगाने के लिए इन कार्ड्स में ‘फेस रिकग्निशन’ (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) की विशेष सुविधा जोड़ी गई है।
इस नए कानून के तहत ग्रामीण विकास को केवल गड्ढे खोदने तक सीमित न रखकर चार मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें जल सुरक्षा परियोजनाएं, प्रमुख ग्रामीण आधारभूत ढांचा, आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर और चरम मौसम से बचाव के कार्य शामिल हैं। अब सभी कार्य ‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं’ के आधार पर तय होंगे, जिन्हें ग्राम पंचायतें खुद तैयार करेंगी और सीधे ग्राम सभाओं से मंजूरी लेनी होगी ताकि विकास कार्य पूरी तरह से स्थानीय जरूरतों के मुताबिक हो सकें।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि मनरेगा से इस नई व्यवस्था में बदलाव पूरी तरह से निर्बाध होगा ताकि मजदूरों को कोई परेशानी न हो। जो मनरेगा कार्य अभी चल रहे हैं या अधूरे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए नई योजना में माइग्रेट कर लिया जाएगा। इसके अलावा, जिन मजदूरों का ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा हो चुका है, उनके मौजूदा कार्ड तब तक पूरी तरह मान्य रहेंगे जब तक उन्हें नया स्मार्ट कार्ड जारी नहीं हो जाता। कुल मिलाकर, वीबी-जी राम जी योजना ग्रामीण भारत में रोजगार को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ-साथ देश की राजकोषीय स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

