बिलासपुर:
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने विभागीय स्तर पर हिंदी टाइपिंग (टंकण) परीक्षा आयोजित न होने के कारण वार्षिक वेतनवृद्धि से वंचित किए गए पुलिस विभाग के सहायक उप निरीक्षक (ASI) को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को वर्ष 2020 से 2023 के दौरान देय वार्षिक वेतनवृद्धियों को जोड़ते हुए उनके वेतन का पुनर्निर्धारण किया जाए और उससे जुड़े समस्त आर्थिक लाभ प्रदान किए जाएं।
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क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता एल. वेंकट सत्यनारायण वर्तमान में रायपुर स्थित पुलिस महानिरीक्षक (IG) कार्यालय में पदस्थ हैं। उनकी नियुक्ति 6 जनवरी 2020 को अनुकंपा आधार पर सहायक उप निरीक्षक (मंत्रालयीन) के पद पर की गई थी। इसके बाद नियमानुसार उनकी सेवाएं भी नियमित कर दी गईं।
सेवा शर्तों के अनुसार, पद पर बने रहने या नियमित लाभों के लिए निर्धारित अवधि में हिंदी टंकण कौशल परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य था। हालांकि, संबंधित विभाग द्वारा इस दौरान परीक्षा का आयोजन ही नहीं कराया गया। इसके बावजूद विभाग ने परीक्षा पास न करने का आधार बनाकर याचिकाकर्ता की दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोक दी थीं।
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याचिकाकर्ता का पक्ष: बिना परीक्षा कराए लाभ रोकना अन्याय
विभाग के इस रवैये से आहत होकर सत्यनारायण ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनके अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता कभी भी परीक्षा देने से पीछे नहीं हटे, बल्कि विभाग ने ही निर्धारित समय-सीमा के भीतर हिंदी टाइपिंग परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था नहीं की। जब विभाग की ओर से परीक्षा ही नहीं ली गई, तो कर्मचारी को अयोग्य मानकर उसकी वेतनवृद्धि रोकना पूर्णतः अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
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हाईकोर्ट का निर्णय: 2020 से 2023 तक का मिलेगा लाभ
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने माना कि यदि विभाग ने स्वयं कौशल परीक्षा का आयोजन नहीं किया, तो इसका खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए।
अदालत ने आदेश दिया कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच याचिकाकर्ता की जो भी वेतनवृद्धियां रोकी गई थीं, उन्हें जोड़ते हुए उनका वेतन फिर से निर्धारित किया जाए और इस आधार पर बनने वाले सभी वित्तीय एरियर व लाभ उन्हें नियमानुसार जारी किए जाएं। कोर्ट के इस फैसले को अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक नजीर के तौर पर देखा जा रहा है।


