रायपुर:
छत्तीसगढ़ में बेहतर स्कूली शिक्षा के सरकारी दावों के बीच एक चिंताजनक जमीनी हकीकत सामने आई है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए डेढ़ महीने से भी अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में अब तक विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। एक तरफ जहां स्कूलों में किताबों और शिक्षकों का टोटा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग द्वारा तिमाही परीक्षा का टाइम-टेबल जारी कर दिया गया है। ऐसे में बिना किताबों के पढ़ाई कर रहे लाखों छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
राजधानी के स्कूलों का यह हाल, दूरस्थ इलाकों में स्थिति और गंभीर
राजधानी रायपुर के ही कई प्रमुख सरकारी स्कूलों में अब तक हिंदी, अंग्रेजी और सहायक वाचन सहित कई विषयों की पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। रायपुर के पीएमश्री पंडित आरडी अंग्रेजी माध्यम स्कूल, शांति नगर स्कूल और निमोरा स्कूल जैसे संस्थानों में अब तक पुस्तकें नहीं बंट सकी हैं। कई विद्यालयों में अब तक छात्रों को स्कूल ड्रेस और साइकिलों का वितरण भी नहीं किया जा सका है।
नाम न छापने की शर्त पर कई प्राचार्यों ने बताया कि वे विभाग और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को बार-बार मांग पत्र भेज चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की तरफ से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। राजधानी के प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में इस स्थिति को देखते हुए बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ व आदिवासी बहुल संभागों के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा, लगाया गंभीर आरोप
मामले को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखा हमला बोला है:
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि बिना पुस्तकों के बच्चे घर पर रिवीजन नहीं कर पा रहे हैं। तिमाही परीक्षा की समय-सारणी जारी होने से विद्यार्थी मानसिक तनाव में हैं। यदि परीक्षा परिणाम खराब होता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार नई शिक्षा नीति और कौशल विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ व्यावसायिक शिक्षा व सामान्य पाठ्यक्रमों के छात्रों को किताबें तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। यह सरकार के असंवेदनशील रवैये का प्रमाण है।
बिना किताबों के परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों और अभिभावकों में इस अव्यवस्था को लेकर गहरा असंतोष है और वे जल्द से जल्द अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

