नई दिल्ली
आने वाले त्योहारों के मौसम से ठीक पहले आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार पड़ने लगी है। कमजोर मानसून, दुनिया भर में चल रहे संकट और बाजार में जमाखोरी की वजह से चीनी और चावल के दाम तेज़ी से बढ़ गए हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक ही महीने में चीनी और चावल की कीमतों में 5 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
चीनी और चावल की कीमतें कहाँ पहुँचीं?
खुदरा बाजार में चीनी की कीमत एक महीने पहले लगभग ₹47 प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर करीब ₹50 (₹49.53) प्रति किलो पर पहुँच गई है। थोक बाजार में भी इसके दाम 5% से ज्यादा बढ़कर ₹4,593 प्रति क्विंटल हो गए हैं।
देश भर में चावल की औसत खुदरा कीमत बढ़कर ₹45.13 प्रति किलो हो गई है। दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल) में तो चावल 10 से 15 फीसदी तक महंगा हो चुका है, जिससे लोगों का मासिक राशन बिल काफी बढ़ गया है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
चीनी में तेज़ी का कारण: महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे मुख्य उत्पादक राज्यों में पुराना स्टॉक खत्म हो रहा है और चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में ज्यादा हो रहा है। इसके अलावा सट्टेबाजों और बिचौलियों की वजह से भी दाम बढ़ रहे हैं। इसका असर त्योहारों पर मिलने वाली मिठाइयों, बेकरी और अन्य खाने-पीने की चीज़ों पर पड़ेगा।
चावल में तेज़ी का कारण: कम बारिश, अल-नीनो का खतरा और बाजार में जमाखोरी इसकी मुख्य वजहें हैं। जमाखोरी के कारण बाजार में चावल की आवक कम हो गई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति ऐसे ही बनी रही तो वैश्विक स्तर पर चावल के दाम 30 से 50 फीसदी तक उछल सकते हैं।
तांबा रिकॉर्ड स्तर पर: टीवी, फ्रिज और गाड़ियां भी होंगी महंगे!
वैश्विक बाजार में तांबे (Copper) की कीमत रिकॉर्ड 13,842 डॉलर प्रति टन पर पहुँच गई है। चिली में आई बाढ़ और तूफानों के कारण तांबे की खदानों में काम रुक गया है, जबकि डाटा सेंटरों और बिजली ग्रिड की तरफ से इसकी मांग बहुत ज्यादा है।
तांबा महंगा होने की वजह से आने वाले दिनों में इलेक्ट्रॉनिक सामान (जैसे टीवी, फ्रिज), गाड़ियां और घर में इस्तेमाल होने वाले उपकरण महंगे हो सकते हैं।

