त्योहारी सीजन दस्तक देने वाला है, लेकिन उससे ठीक पहले आम जनता के रसोई के बजट पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ी है। बाजार में चावल, गेहूं और खाद्य तेलों के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं। मोटे और पतले चावल की किस्मों में 5 रुपये से लेकर 20 रुपये प्रति किलो तक का उछाल दर्ज किया गया है। वहीं खाद्य तेलों की बात करें तो राइस ब्रान तेल की कीमतें सोयाबीन तेल से भी ऊपर निकल गई हैं, जबकि सरसों तेल एक बार फिर 200 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर चुका है।
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कारोबारियों का सिंडीकेट और मुनाफाखोरी
स्थानीय बाजारों में चावल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, हालांकि व्यापारियों के पास इसका कोई ठोस कारण नहीं है। जानकारों का कहना है कि हर साल त्योहारों से ठीक पहले उत्पादक और कारोबारी मिलकर एक सिंडीकेट बना लेते हैं। ऊपर से नीचे तक फैले इस नेटवर्क के जरिए बाजार में कृत्रिम तेजी लाकर जमकर मुनाफाखोरी की जा रही है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ रहा है।
खाद्य तेलों का गणित: राइस ब्रान और सरसों तेल में भारी तेजी
खाद्य तेलों के बाजार में फिलहाल बाकी तेलों की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन राइस ब्रान और सरसों तेल के तेवर काफी सख्त हैं।
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राइस ब्रान तेल: हरेली ब्रांड का जो राइस ब्रान तेल पहले चिल्हर (रिटेल) में 125 रुपये में मिलता था, वह अब बढ़कर 130 रुपये का हो गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पाउच एक लीटर का न होकर सिर्फ 800 ग्राम का है। इस हिसाब से देखें तो एक लीटर राइस ब्रान तेल की कीमत लगभग 163 रुपये बैठती है।
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सोया तेल: इस समय सोयाबीन तेल का रेट 155 रुपये प्रति लीटर है, यानी राइस ब्रान तेल अब सोया तेल से भी अधिक महंगा बिक रहा है।
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सरसों तेल: सरसों तेल के दाम एक बार फिर 200 के पार चले गए हैं। यह थोक में 194 रुपये प्रति लीटर और चिल्हर में 205 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है।
मध्य प्रदेश और दक्षिण राज्यों से आवक, पतले चावल की भारी मांग
हमारे राज्य में पतले चावल की सबसे ज्यादा आवक दक्षिण भारत के राज्यों और मध्य प्रदेश से होती है। इसके अलावा स्थानीय उत्पादकों का चावल भी बाजार में बिकता है। बाजार में सबसे ज्यादा मांग पतले चावलों की रहती है और इसी श्रेणी में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई है। हालांकि मोटे चावल के दाम भी 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। गेहूं के दामों में भी 5 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
किस चावल के दाम में कितनी हुई बढ़ोतरी?
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काली मूंछ (सिवनी, म.प्र.): मध्य प्रदेश के सिवनी जिले का काली मूंछ चावल उपभोक्ताओं की पहली पसंद माना जाता है। पिछले दो महीनों में इसके दाम 15 रुपये तक बढ़े हैं। दो महीने पहले इसका थोक भाव 4500 रुपये प्रति क्विंटल (45 रुपये/किलो) था, जो अब बढ़कर 6000 रुपये (60 रुपये/किलो) हो गया है। चिल्हर में यह चावल 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
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एचएमटी (HMT) चावल: एचएमटी चावल का थोक भाव पहले 45 से 48 रुपये प्रति किलो था। अब यह थोक में 58 रुपये और चिल्हर में 62 से 65 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
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अब्बा हुजूर चावल: राज्य में इस चावल की भारी मांग रहती है। इसके थोक भाव 57 रुपये से सीधे बढ़कर 73 से 74 रुपये प्रति किलो हो गए हैं, जबकि चिल्हर बाजार में यह 80 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गया है।
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जय श्री राम चावल: इस वैरायटी में सीधा 20 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है। पहले इसका थोक भाव 50 से 55 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 70 से 75 रुपये हो गया है। चिल्हर में उपभोक्ता इसे 75 से 80 रुपये प्रति किलो खरीदने को मजबूर हैं।
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जवां फूल चावल: प्रीमियम श्रेणी के जवां फूल चावल के थोक दाम 90 रुपये प्रति किलो से बढ़कर अब सीधे 115 रुपये प्रति किलो पर पहुँच गए हैं।

