सरगुजा जिले के बतौली में सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल को अपनी चपेट में ले लिया। राष्ट्रीय राजमार्ग 43 (NH-43) का बरसाती पानी सीधे स्कूल परिसर और कक्षा कक्षों में घुस गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। स्कूल में पानी भरने के बाद उपजी स्थिति को देखते हुए प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा के लिए तुरंत छुट्टी देनी पड़ी, वहीं आज भी डर के चलते स्कूल में छात्रों की उपस्थिति काफी कम दर्ज की गई।

10 कमरों में भरा पानी, 250 छात्रों की पढ़ाई प्रभावित
दोपहर करीब 1 बजे शुरू हुई तेज बारिश के बाद स्कूल परिसर में घुटनों तक पानी भर गया, जिससे विद्यालय किसी तालाब की तरह नजर आने लगा। स्कूल के करीब 10 कमरों में पानी घुस जाने से कक्षा 6वीं से 10वीं तक के लगभग 250 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्कूल में कुल 600 विद्यार्थी अध्यनरत हैं, लेकिन इतने बड़े परिसर में पानी भरने के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
UDISE+ 2025-26: छत्तीसगढ़ की शिक्षा के लिए उम्मीद की रिपोर्ट, लेकिन असली परीक्षा अब 33 जिलों की शिक्षक बढ़े, ड्रॉपआउट घटा, ट्रांजिशन रेट सुधरा, डिजिटल सुविधाएं बढ़ीं… अब सवाल- क्या यह बदलाव जशपुर, सरगुजा और बस्तर के अंतिम गांव तक पहुंचा?
नालियों की बदहाली और लापरवाही पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि नेशनल हाईवे-43 के किनारे बनाई गई लाखों रुपये की नालियाँ पूरी तरह से ‘शो-पीस’ बनकर रह गई हैं। शांतिपारा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तहसील कार्यालय और अन्य सरकारी भवनों के पानी की निकासी के लिए बनी ये नालियाँ सफाई के अभाव में चोक हो चुकी हैं। चूंकि स्वामी आत्मानंद स्कूल इन सभी कार्यालयों के निचले हिस्से में स्थित है, इसलिए सड़क और सरकारी दफ्तरों का पूरा पानी सीधे स्कूल परिसर में जमा हो जाता है। अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा अब मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रबंधन का पक्ष और सुरक्षा के दावा
स्कूल की प्रभारी प्राचार्य प्रसन्ना केरकेट्टा ने इस गंभीर स्थिति पर कहा कि बारिश का पानी पूरे परिसर में भर गया था, जिसे देखते हुए बच्चों को वैकल्पिक कमरों में शिफ्ट किया गया था। उन्होंने बताया कि जलभराव की समस्या को देखते हुए तत्काल जेसीबी मंगवाई गई और जल निकासी के लिए रास्ता बनाया गया है। अब परिसर में पानी नहीं भर रहा है और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
अभिभावकों में नाराजगी
इधर, स्कूल में पानी भरने की घटना से अभिभावक बेहद आक्रोशित और चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि बरसात शुरू होने से पहले जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो पूरे मानसून सत्र के दौरान बच्चों के लिए स्कूल जाना जोखिम भरा रहेगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि एनएच के अधिकारियों की लापरवाही की जांच हो और तत्काल प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ न हो।
सरकारी स्कूलों में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की ‘ऑनलाइन उपस्थिति’ पर सख्ती, VSK App का उपयोग अनिवार्य

