11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र; 20 अक्टूबर को मनेगी नवमी और विजयादशमी
आश्विन मास के प्रमुख व्रत एवं त्योहार (तिथि अनुसार सूची)
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27 सितंबर (रविवार) – प्रतिपदा श्राद्ध: आश्विन मास के पहले दिन प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जाता है। जिन पूर्वजों का देहावसान प्रतिपदा तिथि पर हुआ हो, उनके निमित्त इस दिन तर्पण और पिंडदान का विधान है।
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29 सितंबर (मंगलवार) – विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी: भगवान श्रीगणेश के निमित्त यह व्रत रखा जाता है। जीवन के संकटों को दूर करने और संतान के सुख-समृद्धि की कामना के लिए महिलाएं यह पूजन करती हैं।
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3 अक्टूबर (शनिवार) – जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया): संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए माताएं निर्जला रहकर जितिया का कठिन व्रत रखती हैं।
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6 अक्टूबर (मंगलवार) – इंदिरा एकादशी: पितृ पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी बेहद फलदायी मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और दान करने से पापों का क्षय होता है और सात पीढ़ियों तक के पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
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8 अक्टूबर (गुरुवार) – गुरु प्रदोष व्रत: प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। यह व्रत मनोकामना पूर्ति और गृह शांति के लिए किया जाता है।
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10 अक्टूबर (शनिवार) – सर्वपितृ अमावस्या (दर्श अमावस्या): इस दिन पितृ पक्ष का समापन होता है। अज्ञात तिथियों वाले सभी पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान इसी दिन किया जाता है।
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11 अक्टूबर (रविवार) – शारदीय नवरात्र आरंभ (कलश स्थापन): आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र शुरू होगा। इस दिन घटस्थापना के साथ प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होगी।
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17 अक्टूबर (शनिवार) – तुला संक्रांति: ग्रहों के राजा सूर्य देव कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति काल में स्नान और दान का विशेष पुण्य माना गया है।
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19 अक्टूबर (सोमवार) – महा अष्टमी एवं महा नवमी: नवरात्र के इस पावन दिन मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की उपासना, हवन और कन्या पूजन किया जाएगा।
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20 अक्टूबर (मंगलवार) – विजयादशमी (दशहरा) एवं प्रतिमा विसर्जन: बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा पर्व मनाया जाएगा। साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं और कलश का विसर्जन किया जाएगा।
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22 अक्टूबर (गुरुवार) – पापांकुशा एकादशी: भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित यह एकादशी समस्त पापों का नाश कर पुण्य फल प्रदान करने वाली मानी गई है।
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23 अक्टूबर (शुक्रवार) – शुक्र प्रदोष व्रत: शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत में महादेव और देवी पार्वती की आराधना से सुख, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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25 अक्टूबर (रविवार) – शरद पूर्णिमा (कोजागरा): आश्विन पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस रात चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करते हैं। मां लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है और मिथिलांचल में इसे कोजागरा के रूप में उल्लास के साथ मनाया जाता है।विश्व पर्यटन दिवस 2026: AI और डिजिटल तकनीक से बदल रहा भारतीय पर्यटन























