रायपुर //-
वीएसके एप्प में अटेंडेंस नहीं होने पर शिक्षकों के वेतन कटौती संबंधी खबरों के बीच प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अपनी कड़ी एवं तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसका पुरजोर विरोध किया है।
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ पंजीयन क्रमांक 122202595034 के प्रदेश अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ सहायक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के संस्थापक जाकेश साहू ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार आखिर चाहती क्या है…..??????
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शिक्षकों को स्वतंत्र रूप से पढाना देना चाहती है …???? या उसे मानसिक रूप से परेशान करना चाहती है…????? उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि प्रदेश के एक भी शिक्षक का वेतन वीएसके की वजह से यदि रुका या काटा गया ….. तो जंतर मंतर दिल्ली में हुए प्रदर्शन की तर्ज पर छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालय, 146 विकासखंड मुख्यालयों तथा राज्य के प्रत्येक शहर, गांव, गली मोहल्लो, चौक चौराहो इसका विरोध प्रदर्शन होगा।
प्रदेश के समस्त शिक्षक एवं सभी संगठन स्कूलों में पढ़ाई छोड़ सड़क पर उतरेंगे। जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी। जाकेश साहू ने आगे कहा कि शिक्षक प्रतिदिन स्कूल जाते हैं। ईमानदारी से पढाते हैं। उनका स्कूल में हाजिरी रजिस्टर रहता है। जिसमें उपस्थित दर्ज होती है। उसके बाद भी सरकार ने इस प्रकार से एप्स लाया है।
सरकार द्वारा स्कूलों में मॉनिटर की पहले से ही एक विधिवत एवं कानूनी प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसके तहत शिक्षकों के ऊपर प्रधान पाठक, प्रधान पाठक और स्कूलों के ऊपर शैक्षिक समन्वयक, इन सब के ऊपर विकासखंड शिक्षाधिकारी, बीआरसी, इनके ऊपर डीईओ, डीएमसी, जिला कलेक्टर, सारे नेता, सारे अधिकारी सब होते है। जो स्कूलों पर सतत निगरानी करते है।
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साथ ही गांव वाले भी यह नजर रखते हैं कि कौन से शिक्षक स्कूल आता है। कौन नहीं आता। कौन क्या पढ़ाता है..???? क्या नहीं पढ़ाता..???? साथ ही इसके ऊपर एक विद्यालय प्रबंध समिति भी होती है। उसके बाद भी शिक्षकों को वीएसके के नाम से परेशान करना किसी भी तरीके से उचित नहीं है।
कई जगह मोबाइल के टावर ही नहीं रहते। कई जगह सरवर काम नहीं करता है एवं नाना प्रकार की समस्या इसमें बनी हुई है। और इस पर सरकार की तानाशाही रवैया, आदेश के ऊपर आदेश, इस प्रकार से यह दर्शाता है कि प्रदेश सरकार स्कूलों में शिक्षकों को पढाने के अलावा उनको जानबूझकर उकसा रही है। इससे यह सिद्ध होता है कि सरकार यह चाहती कि प्रदेश में शिक्षकों का उग्र आंदोलन हो।

