नई दिल्ली:
देशभर में आपराधिक मामलों की वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य संग्रह को अधिक सटीक व आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने फोरेंसिक क्षमताओं के आधुनिकीकरण की योजना को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत देश के सभी जिलों और राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (FSL) को आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘मोबाइल फोरेंसिक वैन’ (MFV) उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पूरी योजना के लिए 496.66 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है।
अत्याधुनिक फोरेंसिक उपकरणों से लैस होंगी वैन
ये मोबाइल फोरेंसिक वैन सीधे अपराध स्थल पर पहुंचकर जांच की प्रक्रिया को सुगम और तेज बनाएंगी। इन वैन में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जो निम्नलिखित कार्यों में सहायता करेंगे:
अपराध स्थल का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण: घटना स्थल की हाई-क्वालिटी फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग।
साक्ष्य संग्रह एवं जांच: जैविक और सूक्ष्म (Micro) साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संग्रह।
फिंगरप्रिंट और भौतिक साक्ष्य: उंगलियों के निशानों का विकास और मापन, साथ ही भौतिक साक्ष्यों की मौके पर ही प्रारंभिक जांच।
सुरक्षित संरक्षण और डिजिटल रिकॉर्ड: एकत्रित नमूनों और साक्ष्यों का सुरक्षित रख-रखाव एवं उनका डिजिटल दस्तावेजीकरण।
अब तक 619 वैन आवंटित, राज्यों के पास रहेगी परिचालन की जिम्मेदारी
योजना के विस्तार के तहत अब तक देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 619 मोबाइल फोरेंसिक वैन आवंटित की जा चुकी हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन वैन में तैनात होने वाले कर्मचारियों की भर्ती और उनके दैनिक परिचालन (Operational Cost) से जुड़ा पूरा खर्च संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इस पहल से अदालतों में वैज्ञानिक साक्ष्यों के बल पर आपराधिक मामलों का निस्तारण तेजी से हो सकेगा।

